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कोल्ड स्टोर सुविधा होती तो सेब पर नहीं आता संकट, सिर्फ 10 फीसदी भंडारण की क्षमता

Thu, 26 Aug 2021 02:11 AM IST
Krishan Singh विपिन काला, अमर उजाला, शिमला

सार

बागवानों का सेब तैयार है और अब तुरंत मंडियों में बेचना मजबूरी है। सेब नहीं बिका तो बागवान की साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। यही कारण है कि प्रदेश के बागवानों को सेब औने पौने दाम में बेचना पड़ रहा है। 
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सेब (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में बागवानों को कोल्ड स्टोर की सुविधा मिलती तो सेब पर आर्थिक संकट नहीं आता। प्रदेश के कोल्ड स्टोरों में सिर्फ दस फीसदी सेब भंडारण की क्षमता मौजूद है। प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र के कोल्ड स्टोरों में करीब पचास हजार मीट्रिक टन सेब भंडारित किया जा सकता है। 

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बागवानों का सेब तैयार है और अब तुरंत मंडियों में बेचना मजबूरी है। सेब नहीं बिका तो बागवान की साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। यही कारण है कि प्रदेश के बागवानों को सेब औने पौने दाम में बेचना पड़ रहा है। अगर सेब पर इथेनॉल को स्प्रे नहीं किया तो इसे करीब 15 दिन तक रोका जा सकता है। स्प्रे के बाद सेब 10 दिन में खराब हो जाता है। 

हिमाचल में होता है 6 से 10 लाख मीट्रिक टन सेब पैदावार 
प्रदेश देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्य के रूप में अपनी पृथक पहचान बनाए हुुए है। राज्य में हर साल 6 से 10 लाख मीट्रिक टन सेब की पैदावार होती है। प्रदेश में अधिकांश बागवानों को सेब के भंडारण की सुविधा नहीं मिल पाती। इनमें माध्यम और लघु बागवानों की संख्या ज्यादा है। 
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सिर्फ 50 हजार मीट्रिक  टन सेब के भंडारण की क्षमता
राज्य में सिर्फ 50 हजार मीट्रिक  टन सेब के भंडारण की क्षमता है। सरकार और निजी क्षेत्र के कोल्ड स्टोरों में बागवानों का सेब रखने की सुविधा न के बराबर है। निजी क्षेत्र के कोल्ड स्टोर में कंपनी बागवानों से सेब खरीद कर स्टोर करती है। आफ सीजन में ये कंपनियों मोटे मुनाफे में सेब बाजार में बेचते हैं। 

बाहरी राज्यों को कोल्ड स्टोर में बागवान 35 रुपये प्रति बॉक्स कर रहे खर्च
बाहरी राज्यों के कोल्ड स्टोर में सेब रखने का खर्चा 35 रुपये प्रति माह प्रति पेटी का खर्चा आता है। प्रदेश के गिनती के बागवान यह सुविधा ले पाते हैं। 

हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि सेब की बंपर फ सल होते ही बागवानों को ए ग्रेड के सेब को अच्छे दाम नहीं मिलते हैं। इस साल भी यही समस्या खड़ी है। सेब बागवानों के लिए मंडियों के साथ की कोल्ड स्टोरों के निर्माण की जरूरत है। इन कोल्ड स्टोरों में सेब रखने की व्यवस्था हो, जिससे सेब बागवान बाजार मांग के अनुसार धीरे-धीरे सेब बेच सकें। राज्य में निजी क्षेत्र के कोल्ड स्टोरों में भी बागवानों को फसल भंडारण की सुविधा नहीं मिलती है।
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प्रदेश में पिछले पांच साल में कितना सेब पैदा हुआ
वर्ष                           करोड़ पेटी सेब
2015                        3.88 
2016                        2.40
2017                        2.08
2018                        1.65 
2019                        3.24
2020                        3.24
2021                        अनुमानित 4 करोड़ पेटी

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