हिमाचल में तेजी से फैलते स्वाइन फ्लू को लेकर यहां के स्कूलों और कॉलेजों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी स्कूल मुखियाओं को प्रार्थना सभा में बच्चों को स्वाइन फ्लू की जानकारी दिए जाने के आदेश दिए हैं।
ये आदेश सभी वरिष्ठ माध्यमिक और हाई स्कूलों को जारी किए गए हैं। सभी कॉलेजों में प्रवक्ताओं को भी छात्रों को स्वाइन फ्लू के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। शुक्रवार को उच्च शिक्षा निदेशक शशि भूषण सेखरी ने इस बारे में मोस्ट अर्जेंट नाम से एक नोटिस जारी किया है।
शिक्षकों को सुबह के सेशन में छात्रों को इस बीमारी के लक्ष्णों और इससे निपटने के उपाय बताने को कहा गया है।
ये हैं आरंभिक लक्षण
नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होनामांसपेशियों में काफी दर्द या अकड़न महसूस करनासिर में भयानक दर्दकफ और कोल्ड लगातार खांसी आनानींद नहीं आना बहुत ज्यादा थकान महसूस होनाबुखार होना दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़नागले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना
बरतें ये सावधानियां
ये एक तरह का वायरल है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। ऐसे में खुद अपना बचाव करें।वायरस से बचाव के लिए मास्क पहनें। मगर मास्क तभी कारगर होगा, जब उसे सही ढंग से पहना जाएगा।मास्क ऐसे बांधें ताकि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाएं।एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें, क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।भीड़ भरी जगहों मसलन सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं।हालांकि सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है और नाक काफी ज्यादा बहती है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इसका इलाज शुरू हो जाना चाहिए।अपने हाथ समय समय पर धो लेने चाहिए। परिवार में किसी को फ्लू हो गया है तो उसे अलग कमरे में रखें।
आखिरकार जाग गई सरकार
स्वाइन फ्लू से तीन मौतों के बाद आखिरकार हिमाचल सरकार की नींद टूट गई। स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने शुक्रवार को आईजीएमसी अस्पताल जाकर स्वाइन फ्लू से निपटने के इंतजाम की समीक्षा की। उन्होंने स्वाइन फ्लू टेस्ट के लिए एक नई मशीन और वेंटिलेटर खरीदने को जल्द प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने टेस्ट किट और भरपूर मात्रा में दवा होने का दावा किया। मंत्री ने प्रबंधन को निर्देश दिए कि मरीज का टेस्ट करने में कंजूसी न बरतें बल्कि अधिक से अधिक संख्या में टेस्ट करें। स्वास्थ्य मंत्री शुक्रवार सुबह करीब ग्यारह बजे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आपातकालीन वार्ड का निरीक्षण किया। इसे अपग्रेड करने के लिए प्रबंधन से प्रस्ताव भी मांगा।
आईसोलेशन वार्ड में जाकर स्वास्थ्य मंत्री ने मरीजों का हालचाल जाना और मौजूदा स्टाफ से मरीजों को दिए जा रहे ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी ली। पैरामेडिकल स्टाफ के साथ बैठक भी की। मंत्री ने डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को भी स्वाइन फ्लू से बचने की हिदायत दी। इलाज के दौरान वह खुद भी सुरक्षित रहें। करीब एक घंटे अस्पताल में रुकने के बाद स्वास्थ्य मंत्री लौट गए।
मंत्री ने मास्क लगाकर पूछा मरीजों का हाल
स्वाइन फ्लू का खौफ शुक्रवार को भी आईजीएमसी अस्पताल में दिख रहा था। स्वास्थ्य मंत्री ने भी एहतियात के तौर पर मास्क लगा रखा था। इनके साथ चली टीम भी मास्क लगाकर ही आईसोलेशन वार्ड में मरीजों से मिली। स्वास्थ्य मंत्री ने स्टाफ को हिदायत दी कि इसमें लापरवाही न बरतें और मास्क आदि का इस्तेमाल करें। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में मास्क और दवा होने की बात भी कही।
आईजीएमसी में केवल एक स्वाइन फ्लू टेस्ट मशीन है। इसकी खरीद साल 2009 में की थी। संदिग्ध मरीजों की संख्या काफी अधिक है। एक नई टेस्ट मशीन और वेंटिलेटर खरीदने की मौखिक मंजूरी शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री ने दी है। हर साल स्वाइन फ्लू के मामले आते हैं। जानकार बताते हैं कि सरकार और प्रबंधन की ओर से यह तैयारियां पहले कर दी जानी चाहिए थी। जब तक मशीन और वेंटिलेटर की खरीद होगी तब तक स्वाइन फ्लू खत्म हो जाएगा। इतना जरूर है कि ये मशीनें अगली बार काम आ जाएं। टेस्ट मशीन की कीमत करीब 25 लाख है।