देश की सबसे बड़ी तटीयकरण योजना पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। ऊना जिले में 922 करोड़ की स्वां नदी तटीयकरण परियोजना के लिए केंद्र सरकार से बजट पर तलवार लटका दी गई है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से का लगभग 308 करोड़ का बजट जारी कर दिया है, लेकिन केंद्र ने अपने हिस्से का बजट क्यों रोक रखा है, इसका जवाब न तो प्रदेश सरकार के पास है और न ही संबंधित विभाग के पास।
इसका असर यह है कि करोड़ों की इस परियोजना की लागत राशि बढ़ गई है। साथ ही परियोजना अपने लक्ष्य से भी छिटक गई है। हालांकि, प्रदेश के कांग्रेस तथा बीजेपी के नेताओं में इस परियोजना को मंजूर करवाने का श्रेय लेने की होड़ लगी हुई है, लेकिन परियोजना के बजट को केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध न करवाने का जवाब किसी के पास नहीं।
सियासी प्रत्यारोपों के बीच झूल रही परियोजना में कार्यरत कई ठेकेदारों की पेमेंट भी रुक गई है। उन्हें आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि बाढ़ संरक्षण विंग ने स्वां नदी के साथ लगती बाकी बची सहायक खड्डों के तटीकरण का प्लान तैयार कर लिया था, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अपने हिस्से का बजट रोकने के कारण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया में रोक लगा दी है।
पूर्व यूपीए सरकार के समय ऊना जिले में बहने वाली स्वां नदी तथा इसकी सहायक खड्डों के तटीयकरण के लिए 922 करोड़ की मंजूरी दी गई थी। इस योजना पर खर्च 30 फीसदी सरकार को और 70 फीसदी केंद्र सरकार को वहन करना था। इस महत्वाकांक्षी तटीयकरण परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2017 तक रखा गया था, लेकिन अब इस परियोजना के तय अवधि में पूरा होने पर संशय बना हुआ है। अभी तक स्वां नदी के तटीयकरण के साथ लगभग बीस सहायक खड्डों का ही काम पूरा हो पाया है।
उद्योग मंत्री एवं हरोली के विधायक मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्र के बजट में कौन टांग अड़ा रहा है, यह सबको पता है। प्रदेश सरकार अपने बजट का लगभग 80 फीसदी से ज्यादा खर्च कर चुकी है, लेकिन केंद्र से बजट रोक देने से जहां परियोजना की लागत राशि बढ़ रही है। परियोजना पर संशय बना हुआ है। सरकार मामले में केंद्र से बात करेगी।
हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर धनराशि के दुरुपयोग की आशंका है। केंद्र ने सोच-समझकर इस प्रोजेक्ट के बजट को रोका है। जब ऊना में केंद्रीय योजनाओं के उद्घाटन या शिलान्यास होते हैं तो प्रदेश के मंत्री को सांसद याद नहीं आते, लेकिन अब जब सरकार ने बजट पर रोक लगाई तो आरोप उन पर मढ़े जा रहे हैं।