प्रदेश में अजंता के नाम से प्रसिद्ध ताबो में भारतीय बौद्ध दर्शन संस्थान (आईआईबीडी) खुलेगा। इसके लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से प्रदेश सरकार के प्रस्ताव की मंजूरी दे दी गई है। इस संस्थान के निर्माण में करीब 45 करोड़ खर्च होंगे।
इससे प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बताया कि लाहौल-स्पीति स्थित ताबो मोनेस्ट्री 996 एडी में बौद्ध दर्शन शास्त्र और जनजातीय संस्कृति के अध्ययन का केंद्र रहा है।
ताबो में बौद्ध अध्ययन की प्राचीन पीठ को संरक्षित करने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ताबो में भारतीय बौद्ध दर्शन संस्थान स्थापित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। कहा कि ताबो बौद्ध अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र है।
प्रदेश को मिलेगी विशेष पहचान
यहां बौद्ध दर्शन संस्थान स्थापित होने पर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलेगी। केंद्र में अपने इस्पात मंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ताबो में यह संस्थान स्थापित करने का सुझाव दिया था।
यह केंद्र प्राचीन बौद्ध अध्ययन पीठ को संरक्षित और प्रसारित करने में अहम सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मोहाल ढांग चुम्मी में लगभग 30 एकड़ भूमि को केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत किया गया है।
संस्थान स्थापित करने के लिए इस भूमि को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के नाम स्थानांतरित किया जाएगा। परियोजना पर 45 करोड़ खर्च होंगे। इसे पूर्ण रूप से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।
केंद्र ने किया मंजूर
स्थल चयन से संबंधित मामले के कारण यह मामला वर्ष 2011 से लंबित था। भारत सरकार ने राज्य सरकार की संस्तुतियों को स्वीकृत कर लिया है। सीएम ने कहा कि प्राचीन बौद्ध अध्ययन पीठ न केवल जनजातीय क्षेत्र स्पीति और किन्नौर के बौद्ध साधुओं तथा विद्यार्थियों के लिए लाभप्रद होगी, बल्कि अन्य क्षेत्रों के शोधार्थियों के लिए भी सहायक सिद्ध होगा।
भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्थल के तौर पर घोषित ताबो गोंपा में लगभग 11 शताब्दी की प्राचीन बौद्ध भित्ति चित्र हैं। परियोजना के पूरा होने पर ताबो तथा हिमाचल बौद्ध अध्ययन विश्व मानचित्र पर आ जाएगा।