उम्र का शतक पूरा करने के बाद भी कोई बिना नजर के चश्मे के सुई में धागा पिरो ले तो हैरत तो होगी ही। नगरोटा बगवां के जंद्राह की 105 वर्षीय रैणी देवी ऐसा करती हैं। इतना ही नहीं रैणी देवी अपने दिनचर्या के कामों के अलावा खेतीबाड़ी और दूसरे काम कभी नहीं छोड़ती।
रैणी देवी का विवाह 15-16 वर्ष की आयु में हो गया था। इस समय उनकी सबसे बड़ी बेटी की आयु लगभग 88 वर्ष है। उनके चार बेटे तथा सात बेटियां हुईं। सबसे बड़े बेटे की आयु 78 वर्ष है। बचपन से ही मक्की, जंगली साग सब्जियां, दूध और घी खाती आई हैं।
अमर उजाला से बातचीत में रैणी देवी बताती हैं कि विवाह के समय जब वह अपने ससुराल आई, उन्होंने सुई-धागे से हाथों से सिला शादी का जोड़ा पहना हुआ था लेकिन पैरों में चप्पल नहीं थी। रैणी देवी ने बताया कि सेहत में कोई गड़बड़ी नहीं है। उन्हें कभी भी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
रैना देवी के बेटों शिव राम, लश्करी राम, केहर सिंह तथा मान चंद ने बताया कि बेटे बेटियों, पोते पोतियां और नाते नातियों का उनका परिवार 50 लोगों का है। उनकी माता के बड़े पोते की आयु 53 वर्ष हो चुकी है। उनकी माता इस आयु में भी अपने दिनचर्या के काम स्वयं करती हैं।