दलाईलामा ने कहा कि कई तिब्बतियन चाहते हैं कि वह तिब्बत वापस जाएं। लेकिन, तिब्बत के लोग इस बात की प्रशंसा करते हैं कि दलाईलामा भारत जैसे एक आजाद देश में रह रहे हैं। बेशक मेरा शरीर भारत में है लेकिन मेरा दिमाग और दिल तिब्बत में रहता है।
मैं भी खाता था मांस, पर शाकाहार सबसे उत्तम
बौद्ध भिक्षुओं की ओर से मांस खाने के प्रश्न पर दलाईलामा ने कहा कि शाकाहार भोजन सबसे बेहतर है। लोगों को शाकाहार भोजन ही अपनाना चाहिए। तिब्बत के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर सब्जी उगती ही नहीं है। इसलिए, वहां पर मांस खाया जाता है। वह भी पहले मांस खाते थे। भारत आकर उन्होंने 1964 में मांस खाना बंद कर दिया लेकिन वह बीमार हो गए। चिकित्सकों की राय पर अब वह इसका बहुत कम प्रयोग करते हैं।