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धर्मशाला में दलाईलामा ने विद्यार्थियों से किया संवाद, बोले- सामंतवाद से जुड़ा है पुनर्जन्म

Fri, 25 Oct 2019 10:13 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
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- फोटो : अमर उजाला
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धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि पुनर्जन्म सामंतवाद (जागीरदार प्रथा) से जुड़ा हुआ है। अब यह समाप्त होना चाहिए। कुछ निश्चित परंपराएं तो ठीक हैं लेकिन कई सामंतवाद से जुड़ी हैं। जैसे मेरा अपना दलाईलामा संस्थान भी मुझे लगता है कि सामंतवाद (जागीरदार प्रथा) से जुड़ा हुआ है। इसलिए वर्ष 1969 की शुरुआत में मेरे एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि दलाईलामा संस्थान आगे भी जारी रहना चाहिए लेकिन यह केवल कुछ लोगों (तिब्बतियों) तक ही केंद्रित नहीं होना चाहिए।

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मुख्य बौद्ध मंदिर मैकलोडगंज में दलाईलामा ने यह बात बुद्धिज्म के एक छात्रा के प्रश्न के जवाब में कही। छात्रा ने पूछा था कि आधुनिक विज्ञान और आधुनिक शिक्षा आगे बढ़ रही है लेकिन परंपरा उसी तरह आगे नहीं बढ़ रही। छात्रा ने परंपरा की उन्नति पर दलाईलामा का दृष्टिकोण पूछा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से धर्मगुरु के दिशा-निर्देशों के आधार पर धर्मशाला डिग्री कॉलेज में पुरातन भारतीय ज्ञान का छह माह का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के उपलक्ष्य पर दलाईलामा ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।

इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, भूटान और कई राज्यों के विद्यार्थी भी मौजूद थे। 
धर्मगुरु ने पुनर्जन्म पर कहा कि तिब्बतियन इतिहास में कई लामाओं (गुरु) ने अद्भुत योगदान दिया लेकिन कइयों ने तिब्बती समुदाय को शर्मशार भी किया। व्यक्तिगत रूप से कुछ लामाओं ने पुनर्जन्म के नाम का इस्तेमाल किया। उन्होंने कभी भी अध्ययन पर ध्यान नहीं देकर बौद्ध धर्म को शर्मसार किया। इसलिए वह महसूस करते हैं कि लामाओं की कोई संस्था नहीं होनी चाहिए और न ही उनका पुनर्जन्म।  

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मेरा दिल और दिमाग तिब्बत में रहता है 

दलाईलामा ने कहा कि कई तिब्बतियन चाहते हैं कि वह तिब्बत वापस जाएं। लेकिन, तिब्बत के लोग इस बात की प्रशंसा करते हैं कि दलाईलामा भारत जैसे एक आजाद देश में रह रहे हैं। बेशक मेरा शरीर भारत में है लेकिन मेरा दिमाग और दिल तिब्बत में रहता है। 

मैं भी खाता था मांस, पर शाकाहार सबसे उत्तम 
बौद्ध भिक्षुओं की ओर से मांस खाने के प्रश्न पर दलाईलामा ने कहा कि शाकाहार भोजन सबसे बेहतर है। लोगों को शाकाहार भोजन ही अपनाना चाहिए। तिब्बत के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर सब्जी उगती ही नहीं है। इसलिए, वहां पर मांस खाया जाता है। वह भी पहले मांस खाते थे। भारत आकर उन्होंने 1964 में मांस खाना बंद कर दिया लेकिन वह बीमार हो गए। चिकित्सकों की राय पर अब वह इसका बहुत कम प्रयोग करते हैं।
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