वर्तमान में इसकी सुविधा केवल आईजीएमसी शिमला और मेडिकल कॉलेज टांडा में ही है। जबकि पहाड़ी राज्य में घायल लोगों को सिविल अस्पतालों में इस इलाज की जरूरत पड़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजने की तैयारी है।
ताकि सर्जरी और इंप्लांट की सुविधाएं सिविल अस्पतालों में देकर मरीज की लंबे सफर की मजबूरी को दूर किया जा सके। सम्मेलन के पहले दिन रीढ़ की हड्डी जैसे दिखने वाले कृत्रिम अंग पर स्पाइन सर्जरी और इंप्लांट को स्क्रू व प्लेट्स से लगाने की प्रेजेंटेशन दी गई।
तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन का शनिवार को सीएम जयराम ठाकुर विधिवत शुभारंभ करेंगे। सम्मेलन में हिमाचल के 100 जबकि दूसरे राज्यों के 25 डेलीगेट्स भाग लेने यहां आ हैं। इनमें एम्स, पीजीआई, पुणे, फोर्टिस चंडीगढ़, मौलाना आजाद मेडिकल कालेज दिल्ली, सर गंगा राम मेडिकल कालेज, आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कालेज के विशेषज्ञ विशेष रूप से शामिल हो रहे हैं।