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ब्रेन ट्यूमर दिवस: इस वजह से तेजी से फैल रहा ब्रेन ट्यूमर

Wed, 08 Jun 2016 09:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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ब्रेन ट्यूमर
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आज ब्रेन ट्यूमर दिवस है। ब्रेन ट्यूमर लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है। आईजीएमसी में छह माह में डॉक्टरों ने 102 ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए। आईजीएमसी के न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी ठाकुर ने बताया कि पिछले छह माह के दौरान जांच के बाद पंद्रह फीसदी लोगों में ब्रेन ट्यूमर पाया गया है।
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ब्रेन ट्यूमर में बिनाइन और मेलगनेंट जैसे अन्य दो ट्यूमर होते हैं। यह ट्यूमर व्यक्ति के दिमाग पर गहरा असर डालते हैं। एक ओर जहां बिनाइन ट्यूमर व्यक्ति के दिमाग पर दबाव डालता है। अगर समय रहते मरीज को उपचार मिले तो इस ट्यूमर से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि दूसरी ओर मेलगनेंट ट्यूमर (कैंसर) लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।

डब्ल्यूएचओ ने इसे चार ग्रेडों में बांटा है। ग्रेड वन में दस साल के कम उम्र के बच्चों में भी यह ट्यूमर पाया गया है। ग्रेड वन होने के कारण इसका उपचार संभव है। रेडिएशन जोन में काम करने और बार बार एक्सरे करवाने से ब्रेन ट्यूमर होता है। चिकित्सकों के अनुसार खतरनाक होते ब्रेन ट्यूमर को सीटी स्कैन और एमआरआई करवाने से पता लगाया जा सकता है।
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वही प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में पांच से दस हजार रुपये पर लोगों का ऑपरेशन किया जा रहा है। जबकि निजी अस्पतालों में करीब तीन लाख रुपये का खर्चा आता है। आठ जून को वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर दिवस है। ब्रेन ट्यूमर के प्रति लोगों में जागरूकता होने के कारण सन 2000 से लेकर प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है।

क्या है कारण

ब्रेन ट्यूमर
किरणों की चपेट में आना
मरीज का बार बार एक्सरे होना
चोट लगना
सेल फोन से निकलने वाली रेडिएशन

लक्षण
सुबह उठने पर सिरदर्द होना
अचानक उल्टी आना
मरीज को अचानक फिट पड़ना
व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आना
आंखों में रोशनी कम होना
अधरंग हो जाना
ट्यूमर होने पर जुबान का बंद होना

उपचार
बिनाइन ट्यूमर कैंसर रहित होता है। ट्यूमर को ऑपरेशन करके निकाला जा सकता है। जबकि मेलगनेंट ट्यूमर को थोड़ा थोड़ा करके निकाला जाता है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में इसका उपचार संभव है। जबकि बड़ों में कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी देकर इसे निकाला जा सकता है।
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एंटी कनवेनसेट थेरेपी से भी इलाज

ब्रेन ट्यूमर के मरीजों को फिट रोकने के लिए एंटी कनवेनसैट थेरेपी ढाई से तीन साल तक दी जाती है। बार बार होने पर मरीजों को जिंदगी भर थेरेपी दी जाती है।

मेलिगनेंट (कैंसर) ट्यूमर के हैं चार ग्रेड
ग्रेड वन - इसमें छोटे बच्चे को होने वाले ट्यूमर होने पर उपचार दिया जा सकता है।
ग्रेड टू - ट्यूमर पता लगने पर मरीजों को जल्दी उपचार दिया जाता है ।
ग्रेड थ्री और फॉर का ट्यूमर काफी खतरनाक है। इस स्टेज पर होने वाला कैंसर बहुत जल्दी बढ़ता है। इसे ग्लायोबलास्टोमा मल्टी फोरसिंग नाम दिया है। इस स्टेज पर होने वाले कैंसर में व्यक्ति के जीवन को एक साल तक बचाया जा सकता है।

आईजीएमसी में भर्ती मीरा का भी किया सफल ऑपरेशन
हनुमानबड़ोग के रहने वाली मीरा को भी ब्रेन ट्यूमर था। उन्हें बाजू तथा टांग में काफी कमजोरी थी। आईजीएमसी में मीरा को 28 मई को लाया गया था। डॉक्टरों ने 30 मई को मीरा का सफल ऑपरेशन किया।

इस दौरान उन्हें आईसीयू में भी रखा गया था। मीरा ने बताया कि अभी वह स्वस्थ है। डॉक्टरों ने कहा है कि कुछ ही दिनों में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। ऑपरेशन में विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी ठाकुर, डॉ. जनक और डॉ. करन ने सहयोग दिया।
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