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अमर उजाला पड़ताल : छह साल में नहीं बन पाई साढ़े पांच किलोमीटर सड़क

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ललित कश्यप
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सोलन। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए शामती बाईपास का निर्माण तीन सरकारें बदलने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। 13 साल में सात साल योजना तैयार करने और बजट में लाने में निकल गए। छह साल बाद निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
2016 से काम पूरा करने की सिर्फ तारीख पर तारीख ही दी जा रही है। काम को पूरा करने का लक्ष्य पहले 2018, फिर 2020, 2021 और 2022 रखा है। अभी भी बाईपास को जोड़ने वाले मुख्य पुल का काम अधूरा है। हर चुनाव में बाईपास राजनेताओं का मुद्दा बनता रहा है। मगर चुनाव जीतने के बाद सब भूल जाते हैं।
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बाईपास के लिए नाबार्ड फंडिंग कर रहा है। इस मार्ग का निर्माण 26 करोड़ से किया जा रहा है। इसमें आंजी से शामती तक 5.410 किमी बनने वाले मार्ग से जहां लोगों को जाम से निजात मिलनी थी। इस सड़क से बड़े वाहनों को शहर से बाहर राजगढ़ और चंडीगढ़ के लिए डॉयवर्ट किया जाना है। इससे समय की भी काफी बचत होनी थी।
यह निर्माण कार्य शायद ही इस माह भी पूरा हो। शहर में यातायात का दबाव बहुत बढ़ गया है। प्रतिदिन जाम से लोग बेहाल हैं। लिहाजा लोग बेसब्री से इस निर्माण को पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं। इस मार्ग से चंडीगढ़ से सिरमौर, शिमला जाने वाले लोगों के लिए समय की बचत होनी है। इसमें सिरमौर से चंडीगढ़ को जाने वाले लोगों को शहर से होकर न जाकर बाईपास से निकल सकते हैं।
सेब सीजन में बागवानों को मिलनी थी राहत
सिरमौर, शिमला, अपर शिमला के बागवान भी इस मार्ग से बाहरी राज्यों की मंडियों के लिए अपने उत्पाद भेज सकते हैं। यह मार्ग राजगढ़, शिमला और कुफरी को भी जोड़ता है। वाया गौड़ा होते हुए चायल-कुफरी से शिमला और अपर शिमला के लिए बागवान बाईपास मार्ग का लाभ उठा सकते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट
शामती बाईपास का काम 90 फीसदी पूरा हो गया है। इसमें 200 मीटर में टारिंग शेष है। इसके अलावा मुख्य मार्ग को जोड़ने वाले पुल का निर्माण जारी है। पुल निर्माण का ठेका दूसरे ठेकेदार को दिया है। इसमें कंकरीट बॉक्स और शेल्फ बिछ गई है। अब इसमें फुटपाथ और रैलिंग लगाने का काम किया जा रहा है। मार्ग से वाहन न गुजरे इसके लिए जगह-जगह पर मिट्टी और बजरी के ढेर भी लगाए हैं। डंगे का काम पूरा हो गया है।
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कब क्या हुआ
-2009 में आंजी-शामती बाईपास प्रोजेक्ट की योजना बनी।
-2015 में विभागीय औपचारिकताएं पूरी। छह साल का लगा समय।
-2016 में टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण कार्य शुरू।
-2017 में प्लानिंग की कमी और निजी भूमि के अधिग्रहण में देरी।
-2018 तक भी भूमि अधिग्रहण की समस्या का नहीं हो सका हल।
-2019 बाईपास को जोड़ने के लिए पुल निर्माण में समस्या आई।
-2020 में कोविड कर्फ्यू के बीच मजदूरों की कमी से काम रुका।
- 2020 दिसंबर में निजी भूमि पर 450 छोटे-बड़े पेड़ आड़े आए।
- 2021 में टारिंग का काम शुरू किया गया।
-2022 में बाईपास को जोड़ने वाले मुख्य पुल का कार्य अधूरा।
इतनी तारीखें बदली
-दिसंबर 2016 में काम शुरू।
-दिसंबर 2018 में काम पूरा करने का था लक्ष्य।
-जून 2019 में काम पूर्ण करने दावा।
-2020 में भी काम रहा अधूरा।
- 2021 तक कोविड का हवाला देकर तारीख बढ़ाई।
-2022 के जून महीने में काम पूरा करने का था लक्ष्य
-अब फिर से जुलाई 2022 का दावा
भूमि अधिग्रहण से काम में देरी
भूमि अधिग्रहण, कोविड के कारण काम में देरी हुई है। इसके अलावा मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले पुल के भी दोबारा से टेंडर लगाने पड़े। इसमें काफी समय लग गया। अब करीब सभी काम पूर्ण हो गया है। दो किमी में टारिंग और पुल के साथ फुटपाथ और रैलिंग लगाने का काम किया जा रहा है। जुलाई के अंत तक इसे जनता को सौंप दिया जाएगा।
अरविंद शर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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