हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य महकमा सूबे के मरीजों को लेकर कतई गंभीर नहीं है। वित्तीय वर्ष के छह महीने गुजर गए, लेकिन अभी तक दवा खरीद पर फैसला ही नहीं हो पाया है। ऐसे में प्रदेश के मरीजों को मुफ्त दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। चंद मरीजों को ही छुटपुट दवाएं मिल रही हैं।
प्रदेश सरकार ने शूगर, हार्ट अटैक से कैंसर मरीजों तक मुफ्त दवाएं देने का फैसला लिया था। पहली बार स्वास्थ्य महकमे ने व्यापक विचार विमर्श के बाद जीवन रक्षक दवाओं की सूची में करीब 70 नई औषधियों को शामिल किया है। ऐसे में सूबे के मरीजों को 503 तरह की दवाएं मिलनी थीं, लेकिन अभी तक टेंडर तक नहीं हो पाया है।
स्वास्थ्य निदेशालय से सचिवालय तक केवल बैठकों का दौर चल रहा है। यहां तक कि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के आदेशों को भी अफसर मानने के लिए तैयार नहीं है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में दवा खरीदने के नाम पर लगभग 30 करोड़ रुपये का बजट का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि सिविल सप्लाई निगम को दवाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिया गया था। उनकी ओर से दवाएं क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही हैं, यह गंभीर मामला है। इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य को निर्देश दिया जाएगा, ताकि प्रदेश के मरीजों को जल्द से जल्द दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।