शारदीय नवरात्र 2021: नयनादेवी मंदिर में दर्शन के लिए आरटी पीसीआर या वैक्सीन प्रमाणपत्र अनिवार्य
Tue, 05 Oct 2021 01:34 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, श्री नयनादेवी जी (बिलासपुर)/भरवाईं (ऊना)
सार
उपायुक्त पंकज राय के अनुसार श्रद्धालु मंदिर में स्थित हवन कुंड में बैठकर हवन तो नहीं कर पाएंगे लेकिन प्रसाद की आहुतियां डाल सकेंगे। सरकार की एसओपी कि अनुपालना करते हुए मौली बांधने पर प्रतिबंध रहेगा। जबकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को आरटी पीसीआर व वैक्सीन की दोनों डोज का प्रमाण दिखाना होगा।
हिमाचल प्रदेश के विख्यात तीर्थ स्थल श्री नयनादेवी जी में शारदीय नवरात्रों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है। लगभग 19 महीने बाद प्रशासन ने श्रद्धालुओं को हवन कुंड में आहुतियां डालने की अनुमति प्रदान की है। जबकि बैठकर हवन करने पर मनाही होगी। श्रद्धालुओं को आरटी पीसीआर या वैक्सीन की दोनों डोज का प्रमाण दिखाना होगा। नवरात्रों के दौरान पूरे नयनादेवी क्षेत्र को 9 सेक्टरों में बांटा गया है। 6 सेक्टर अधिकारी सेवाएं देंगे। डीएसपी नयना देवी पूर्णचंद्र को पुलिस मेला अधिकारी और एसडीएम नयनादेवी को मेला अधिकारी नियुक्त किया गया है। उपायुक्त पंकज राय के अनुसार श्रद्धालु मंदिर में स्थित हवन कुंड में बैठकर हवन तो नहीं कर पाएंगे लेकिन प्रसाद की आहुतियां डाल सकेंगे।
सरकार की एसओपी कि अनुपालना करते हुए मौली बांधने पर प्रतिबंध रहेगा। जबकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को आरटी पीसीआर व वैक्सीन की दोनों डोज का प्रमाण दिखाना होगा। तभी उन्हें मंदिर में प्रवेश मिल सकेगा। इसके अलावा मुंडन करने पर प्रतिबंध रहेगा। नयनादेवी मंदिर परिसर में लंगर लगाने और प्रसाद चढ़ाने पर प्रतिबंध रहेगा। उधर, मंदिर अधिकारी विजय गौतम के अनुसार नवरात्रों के दौरान लगभग 150 अस्थायी कर्मचारी रखे जाएंगे। पुजारी अंकुर शर्मा ने बताया कि माताजी के दरबार में हर वर्ष श्रद्धालुओं की ओर से नवरात्र में सजावट का कार्य किया जाता है। इस बार हरियाणा के करनाल की समाजसेवी संस्था मंदिर को सजा रही है। इसमें अभी दो-तीन दिन का समय और लगेगा।
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चिंतपूर्णी नवरात्र को लेकर प्रबंध ढीला
वहीं, शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर में असूज नवरात्र वीरवार को शुरू हो रहे हैं। नवरात्र को शुरू होने में मात्र दो दिन बचे हैं, लेकिन प्रबंधों को लेकर मंदिर प्रशासन की तैयारियां जीरो नजर आ रही हैं। मंदिर को जाने वाली सीढ़ियों की हालत ज्यों की त्यों है। टूटी-फूटी सीढ़ियां मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है। अधिकारियों की बैठकों के बाद भी सीढ़ियों पर नया मारबल अभी तक नहीं लगाया गया है। बताते चलें कि अगस्त में हुआ अष्टमी मेला भी खस्ताहाल सीढ़ियों में ही संपन्न हो गया। अब अगले नवरात्र भी शुरू हो रहे हैं। दो महीने बीत जाने के बाद भी मंदिर को जाने वाले भक्तों को फिर से इन्हीं सीढ़ियों से गुजरना पड़ेगा। इसके अलावा गेट एक के सामने सड़क बदतर है। दोपहिया और चौपहिया वाहनों का गुजरना भी खतरे से खाली नहीं है। अभी तक सड़क की रिपेयर नहीं की जा रही है। चिंतपूर्णी मंदिर में माता रानी के दर्शनों के लिए जगह-जगह लगाई एलईडी स्क्रीन बंद पड़ी हैं।
मंदिर में एंट्री से पहले सुरक्षा की दृष्टि से लगाए मेटल डिटेक्टर भी बंद पड़े हैं। इन सभी मामलों को लेकर कार्यकारी मंदिर अधिकारी रोहित जालटा से पूछा तो उनका कहना था कि इस पर वे कुछ नहीं कह सकते। सड़क की मरम्मत लोक निर्माण विभाग को करनी है। देखने वाली बात यह है कि लगातार चिंतपूर्णी मंदिर की समस्याओं को लेकर मंदिर कार्यालय में तैनात कर्मचारी दूसरे अधिकारी से पूछो कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर धार्मिक स्थल में समस्याओं का अंबार है उसे दूर करने की जिम्मेवारी क्या सिर्फ डीसी की है। डीसी राघव शर्मा ने कहा कि मंदिर की सीढ़ियों में नया मारबल डालने को लेकर टेंडर हो गया है। नवरात्र के बाद ही अब इन सीढ़ियों में मारबल लगाया जा सकेगा। खस्ताहाल सड़क को एक-दो दिन में ठीक करने को कहा जाएगा। मेले के प्रबंधों को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है।