भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की प्रथम पंक्ति के नेता शांता कुमार साल भर से पार्टी में उपेक्षित चल रहे थे। पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की अब कितनी अहमियत बची है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शांता कुमार की ओर से 10 दिन पहले लिखे पत्र का राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जवाब देना तक उचित नहीं समझा।
नतीजतन शांता कुमार को ये पत्र अपनी फेसबुक पर जारी करना पड़ गया। हालांकि अब शांता कह रहे हैं कि उनके समर्थकों ने गलती से ये पत्र फेसबुक पर जारी कर दिया। एफसीआई के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी मोदी सरकार ने शांता कुमार को सौंपी थी। शांता ने ईमानदारी से इसकी रिपोर्ट तैयार की लेकिन सिफारिशों पर अमल अभी तक नहीं हुआ।
पार्टी की उपेक्षा का शिकार हो रहे थे शांता
करीब डेढ़ माह पहले हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर शांता कुमार के संसदीय क्षेत्र स्थित कांगड़ा एयरपोर्ट में उद्घाटन कर चले गए। लेकिन, शांता कुमार को इस कार्यक्रम में बुलाया तक नहीं गया। जबकि, शांता कुमार उस दिन पालमपुर में ही अपने घर पर थे।
मार्गदर्शन मंडल के नाम पर वरिष्ठ नेता हाशिये पर धकेल दिए गए हैं। पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की चल रही उपेक्षा का जवाब आना अब शुरू हो गया है। इसका श्रीगणेश शांता कुमार की ओर से हुआ है। ऐसे में इस बात पर कोई अचंभा नहीं होगा जब आने वाले दिनों में पार्टी के कई और वरिष्ठ नेता भी लेटर बम फोड़ दें।
बताते चलें महीने भर पहले शांता के बुलावे पर योग दिवस पर पालमपुर में भाजपा के पितामह कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी भी आए थे। आडवाणी से मुलाकात के महज 19 दिन बाद शांता ने लेटर बम फोड़ दिया।
मैं अपनी बात पर कायम हूं: शांता
संसद के मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले लेटर बम फोड़कर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाले 1952 से जनसंघ के समय से जुड़े भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि वह अपनी बात पर कायम हैं।
उन्होंने फेसबुक में पोस्ट किए गए पत्र पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि 10 जुलाई को उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बयां की थी। उसके बाद अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया है।
सार्वजनिक नहीं करना चाहता था लैटर
उन्होंने कहा कि वह इस पत्र को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे। उनकी फेसबुक को संचालित करने वाले उनके मित्र से अंजाने में यह पत्र सार्वजनिक हो गया। लेकिन, पत्र में लिखे एक-एक शब्द के साथ वह खड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं।
उपलब्धियों पर सरकार का सिर गर्व से ऊंचा होता है। लेकिन, सरकार पर जब कोई छींटा पड़ता है तो मुझे बहुत पीड़ा होती है। उसी पीड़ा को मैने राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे पत्र में बयां की है। उन्होंने साफ किया कि पत्र सार्वजनिक होने के बाद उनकी केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा से कोई बात नहीं हुई है।