विवि में बी, सी और डी श्रेणी के 274 पदों के लिए आवेदन की बढ़ाई फीस के खिलाफ एसएफआई ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। राज्य कमेटी ने इस फैसले को युवा बेरोजगार विरोधी करार देते हुए लूट बताया। राज्य अध्यक्ष रमन थारटा और सचिव अमित ठाकुर ने कहा कि फैसला वापस न लिया तो आठ जून को प्रदेश भर में धरने-प्रदर्शन होंगे। एसएफआई ने कानूनी लड़ाई लड़ने का भी मन बना लिया है।
अमित ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन भर्तियों को भी कमाई का साधन बनाया है। एक ओर तो सरकार और प्रशासन बेतहाशा फीस बढ़ाकर लाखो इच्छुक छात्रों को शिक्षा से महरूम कर रही है। दूसरी ओर किसी तरह पढ़ पाए आम गरीब युवाओं के लिए भर्ती आवेदन की फीस बढ़ाकर उनके साथ अन्याय किया है। युवाओं को उनके समान अवसर प्रदान करने संवैधानिक अधिकार से महरूम किया का रहा है। इससे भर्ती चंद लोगो तक ही सीमित रहने वाली है।
अमित ठाकुर ने कहा कि दो हजार, एक हजार की फीस अदा करना गरीब आवेदकों को अधिक है। प्रदेश सरकार के महिला अभ्यर्थियों के लिए भर्ती परीक्षा को आवेदन फीस माफ करने के फैसले को भी नजरअंदाज किया है। इस मनमानी को लेकर सरकार भी मौन है। इस मामले में सरकार और विवि का तालमेल नहीं दिख रहा है।
शिक्षकों के लिए विवि खोलने का भी किया विरोध
शिमला। एसएफआई ने विवि प्रशासन के शिक्षकों को ड्यूटी पर बुलाए जाने के फैसले का भी विरोध किया। अभी देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में लॉकडॉन जारी है। प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों को छोड़कर केवल शिक्षकों और गैर शिक्षकों के लिए ही विश्वविद्यालय को खोलने का फैसला एक बार फिर से इन भर्तियों को लेकर संशय पैदा कर रहा है। पहले भी इस विश्वविद्यालय में छुट्टी के दिन साक्षात्कार लेकर अयोग्य लोगों नियुक्तियां मिली हैं।