सायर उत्सव शुरू होने से एक बार फिर गोहर के मंदिरों में रौनक लौट आई है। मंदिर कमेटियों ने देवालयों के कपाट खोलने की तैयारियां पूरी कर ली है। नाग पंचमी को बड़ा देव कमरूनाग के कपाट खुल गए थे और उपमंडल के अनेक मंदिरों में आज देवी देवताओं के कपाट खोले जा रहे हैं।
जालपा देवी मंदिर में आज सायर मेले का आयोजन किया जा रहा है। इसमें आसपास के हजारों लोग माता के दर्शनों के लिए मंदिर में आएंगे और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे। देव लटोगली, संतोषी माता, देव लटोगली, तांदी देव, बालाकामेश्वर, मधोगण देवी, काला कामेश्वर समेत अनेक देवताओं के कपाट आज खुलेंगे।
सायर उत्सव पर काला माह भी समाप्त हो जाएगा। इस दिन नई नवेली दुल्हनें मायके से ससुराल लौटेंगी। चैलचौक के हनुमान मंदिर, चामुंडा मंदिर, म्याह माता मंदिर, दुर्गा भगवती डल मंदिर, चमणी देवी और लंबोदरी माता समेत अनेक मंदिरों में मंगलवार को भक्तों का तांता लगेगा। जालपा देवी के पुजारी यशपाल शर्मा ने बताया कि जालपा मंदिर में मंगलवार को काफी संख्या में श्रद्धालु आएंगे।
ये है मान्यता
सायर पूजन के लिए सोमवार को धान और अन्य अनाजों से बनी सायर लोगों ने खरीदी। वहीं पर इस दौरान अखरोट की खरीदारी में भी लोग जुटे रहे। लोगों ने सायर पूजन और बड़े बुजुर्गों को द्रुब देकर उनका आशीर्वाद लेने के लिए अखरोट की खरीदारी की।
पंडित अमरनाथ कात्यायन ने बताया कि आश्विन संक्रांति मंगलवार को मनाई जाएगी। भले ही सूर्य कन्या राशि में 59 घड़ी 48 पल में प्रवेश करेगा। यह जन्म कुंडली में ही सूर्य काम आएगा, लेकिन संक्रांति मंगलवार को ही मनाई जाएगी।
पंजाब की बैशाखी की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में सायर का त्योहार किसानों की खुशहाली और समृद्धि के साथ जुड़ा हुआ है। सायर के दिन ही ग्रामीण क्षेत्रों में एक माह से बंद देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट खुलते हैं। भादो के काले महीने के दौरान किस परिवार के कौन से व्यक्ति पर डायनों का साया पड़ा है यह जानकारी भी सायर के दिन देवालयों में देवी-देवता के गुर बताते हैं।