राज्य बिजली बोर्ड में पहली जनवरी को वेतन और पेंशन जारी नहीं हुआ। कर्मचारी यूनियन ने प्रबंधन पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए मंगलवार को संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक बुला ली है। इस बैठक में आगामी रणनीति बनाई जाएगी। 28 हजार पेंशनरों और 15 हजार कर्मचारियों की सोमवार को दिन भर बैंक खातों पर नजर टिकी रही। शाम पांच बजे तक भी वेतन-पेंशन जारी नहीं होने से कर्मचारी और पेंशनर खफा हो गए। बिजली बोर्ड के 43 हजार कर्मचारियों और पेंशनरों को अदायगी के लिए हर माह 200 करोड़ रुपये की आवश्कता होती है।
आमतौर पर पुराने माह के अंतिम दिन या नये माह के पहले दिन पेंशन और वेतन जारी होता रहा है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों ने बताया कि प्रदेश में 125 यूनिट तक घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली निशुल्क बिजली की एवज में सरकार की ओर से बोर्ड को अक्तूबर से दिसंबर 2023 तक का पैसा जारी नहीं किया गया है। इसके अलावा बाेर्ड प्रबंधन अन्य साधनों से भी धनराशि का इंतजाम नहीं कर सका। इसके चलते समय से वेतन और पेंशन जारी नहीं हो सकी है। कर्मचारी यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि पहली जनवरी को वेतन और पेंशन जारी नहीं हुआ है। मंगलवार को इस बाबत संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में आगामी रणनीति बनाई जाएगी। उधर, बोर्ड के प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा ने बताया कि इस मामले को सरकार के ध्यान में लाया जाएगा।
बिजली बोर्ड में वेतन-पेंशन नहीं मिलने की खबर का जोड़
सूत्रों ने बताया कि बिजली बोर्ड में हर महीने बिलों से होने वाले राजस्व की राशि करीब 540 करोड़ रहती है। इस राशि से ही कर्मचारियों को वेतन और पेंशनरों को पेंशन दी जाती है। सर्दियों के मौसम दौरान बोर्ड को बिजली की आपूर्ति पूरी करने के लिए महंगी दरों पर दूसरे राज्यों से बिजली खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में जो राजस्व एकत्र हो रहा है वो बिजली खरीद पर खर्च हो रहा है। इस कारण बोर्ड में धनराशि की कमी हो गई है।