हालांकि, 2023 तक 13 लाख रूट स्टॉक मौजूदा अधोसंरचना के अनुरूप तैयार होंगे, जबकि सुनियोजित ढंग से ढांचागत सुविधाओं को मजबूत कर इसे लगभग चार गुणा तक बढ़ाने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि रूट स्टॉक के आयात को धीरे-धीरे कम करके राज्य की नर्सरियों की निर्भरता को बढ़ाएंगे। ठाकुर ने परामर्शी एजेंसी से राज्य के 7000 से 9000 फीट अथवा इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की पैदावार के लिए रूट स्टॉक की किस्मों का पता लगाने के लिए कहा।
उन्होंने पौधों के वितरण से पूर्व राज्य के विभिन्न भागों में क्लस्टरों का उपयुक्त चयन करने के निर्देश दिए। बागवानी मंत्री ने कहा कि विभाग के सभी विषय विशेषज्ञ और बागवानी विकास अधिकारी फील्ड में जाकर परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए किसानों व बागवानों से सीधा संपर्क स्थापित करें।
उन्होंने इस संबंध में रिपोर्ट 10 दिन में सौंपने को कहा। उन्होंने 2018-19 के लिए इस परियोजना के तहत लगभग 150 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्य योजना को भी स्वीकृति प्रदान की। ठाकुर ने कहा कि राज्य के सब-ट्रॉपिकल क्षेत्रों के लिए 1688 करोड़ रुपये की बागवानी परियोजना स्वीकृत की गई है।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान, परियोजना निदेशक दिनेश मल्होत्रा, बागवानी निदेशक एमएल धीमान, नीदरलैंड परामर्शी एजेंसी के प्रमुख फ्रेंक मैस और न्यूजीलैंड एजेंसी का दल तथा बागवानी विभाग के अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।