वीसी प्रो. सिकंदर कुमार (फाइल फोटो)
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एचपीयू के एग्जीक्यूटिव काउंसिल से मिले अनुभव को चुनौती नहीं देने को आधार बनाते हुए कुलपति सिकंदर कुमार को राहत दी है। कोर्ट ने याचिका में तथ्यों का अवलोकन करने पर पाया कि याचिकाकर्ता ने प्रो. सिकंदर को एग्जीक्यूटिव काउंसिल द्वारा दिए गए अनुभव जिसमें उसे 2009 से 2011 तक का प्रोफेसर का अनुभव दिया गया था उसे चुनौती नहीं दी थी।
कोर्ट ने याचिका में दिए तथ्यों के अवलोकन के बाद पाया कि यूजीसी के रेगुलेशन 2010 को अपनाना किसी भी राज्य सरकार के लिए आवश्यक नहीं है परंतु यह डायरेक्टरी है। कोर्ट ने पाया कि प्रार्थी ने सर्च कमेटी के खिलाफ भेदभाव का आरोप भी नहीं लगाया था। कोर्ट ने तमाम तथ्य एवं कानून का गहनता से अवलोकन करने के पश्चात प्रार्थी धर्मपाल द्वारा लगाए गए प्रो. सिकंदर की नियुक्ति संबंधी आरोपों को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर ने याचिकाकर्ता धर्मपाल द्वारा लगाए गए उस आरोप को तथ्यहीन पाते हुए खारिज़ कर दिया जिसके तहत कुलपति की नियुक्ति को चुनौती दी थी।
याची ने कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में आरोप लगाया था कि प्रो. सिकंदर की नियुक्ति यूजीसी रेगुलेशंस 2010 के नियम 7:3:0 के विपरीत की गई है जिससे तहत कुलपति की नियुक्ति केवल 10 वर्ष के प्रोफेसर के अनुभव वाले व्यक्ति की नियुक्ति की जा सकती थी जबकि प्रो. सिकंदर का 10 वर्षों का अनुभव प्रोफेसर के तौर पर नहीं है।