खेल मैदान में लगे बच्चों के झूले भी बिजली तैयार कर सकते हैं। सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल शिमला के छात्रों का मॉडल ऐसा ही कुछ दावा कर रहा है। चंबा में प्रदेश स्तरीय साइंस कांग्रेस में शामिल किए गए मॉडल में झूलों से बिजली तैयार करने की पूरी प्रक्रिया समझाई गई है। छात्रों का दावा है कि मनोरंजन के साथ बिजली तैयार करना बेहद आसान है। यदि इस मॉडल को व्यवहारिक रूप से प्रयोग में लाया जाए तो बिजली संकट दूर करने में आसानी होगी।
मॉडल बनाने वाले छात्र आयुष, आर्यन और दिग्विजय ने बताया कि उन्होंने एक माह में मॉडल तैयार किया है। जिला स्तर पर साइंस कांग्रेस में उनके इस मॉडल को दूसरा स्थान मिला था। ऐसे में उन्हें प्रदेश स्तरीय कांग्रेस में पहला स्थान मिलने की उम्मीद है। मॉडल तैयार करने वाले छात्रों ने बताया कि बच्चों के झूले के नीचे एक टरबाइन लगाई गई है। बच्चों के झूला झूलने पर इस उपकरण की मदद से बिजली तैयार होगी।
छात्रों ने बताया कि मॉडल तैयार करते समय उन्होंने संबंधित विभागाें और सर्च इंजन गूगल से जानकारी जुटानी चाही। लेकिन उन्हें कहीं पर भी इस तरह से बिजली तैयार करने के अनुभव नहीं मिल पाए। ऐसे में उनका यह मॉडल अपनी तरह का पहला प्रतीत हो रहा है। छात्रों का कहना है कि ऊर्जा की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े बांध बनाए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान भी हो रहा है। झूले से बिजली तैयार करने का तरीका नया विकल्प साबित हो सकता है।
झूले से ऐसे बनेगी बिजली
झूलों से बिजली पैदा करने वाले मॉडल में टरबाइन का प्रयोग किया गया है। झूल झूलते समय टरबाइन घूमने लगती है जिससे बिजली पैदा होती है। झूले में टरबाइन लगाने और इससे बिजली पैदा करने की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए छात्रों ने कई बार प्रयोग किए।