ज्योतिषाचार्य और संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. मस्त राम शर्मा ने बताया कि इस मंत्र से अभिमंत्रित कर रक्षा सूत्र को हाथ में बांधने से रोगों और कीटाणुओं का विनाश करने के लिए प्रार्थना की जाती है। रक्षा सूत्र को वैदिक मंत्रों से अभिमंत्रित करते हुए हाथ में बांधा जाता है। बरसात में कीटाणु रोधक शक्ति शरीर में कम हो जाती है। रोग निरोध के लिए हृदय में यह धारणा बन जाती है कि हमने रोगों से छुटकारा पाने के लिए रक्षा सूत्र को बांधा है और हम स्वस्थ रहेंगे। यह त्योहार भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है। बहन अपने भाई के हाथों में रक्षा सूत्र बनती हैं और उसे वर्ष भर किसी भी रोग इत्यादि से का सामना न करना पड़े, उसे छुटकारे की प्रार्थना करती है।
डॉ. मस्त राम शर्मा ने बताया कि महारानी कर्णावती ने भी अपने राज्य की रक्षा के लिए हुमायूं को राखी भेजी थी। रक्षाबंधन के त्योहार के दिन पूरे भारतवर्ष में संस्कृत दिवस के रूप में भी इसे बनाया जाता है, ताकि भारतीय संस्कृति की वैदिक मंत्रों को वैज्ञानिक ढंग देने के लिए स्मरण किया जा सके। रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त, क्योंकि 19 अगस्त दिन 1:30 तक भद्रा रहेगी और उसके उपरांत सारा दिन रक्षाबंधन के लिए शुभ रहेगा, लेकिन फिर भी शुभ मुहूर्त 1:30 से 3:30 बजे के मध्य रक्षा सूत्र को बांधा जाएगा तो शुभ और मांगलिक होगा। आज कुछ लोग आडंबर इसमें करने लगे हैं, इसलिए समान्यता यदि मौली को रक्षा सूत्र के रूप में हाथ में बांधा जाए तो सभी के लिए शुभ कार्य और मांगलिक होगा।