मुख्य न्यायिक मजिट्रेट संदीप सिहाग ने सुनाया फैसला, साल 2014 में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का मामला
दोषी ने खुद को कैश मैनेजमेंट सर्विसेज का अधिकारी बताकर कंपनी कार्यालय से ली थी 18,974 की नकदी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने करीब 11 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में शिमला ग्रामीण के एक व्यक्ति को तीन वर्ष की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। आरोप लगे थे कि दोषी देवराज निवासी गांव शिल्ली बागी, तहसील शिमला ने खुद को यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी का कैश मैनेजमेंट सर्विसेज अधिकारी बताकर धोखाधड़ी से 18,974 रुपये हड़प लिए थे।
यह मामला 4 फरवरी 2014 को ढली थाना क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक 30 जनवरी की सुबह लगभग 10:15 बजे ढली स्थित यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड कार्यालय में एक व्यक्ति आया। उसने खुद को कैश मैनेजमेंट सर्विसेज (सीएमसी) का अधिकारी बताकर कंपनी के माइक्रो ऑफिस से डिलीवरी के लिए नकदी ली और इसके लिए रसीद भी जारी कर दी। बाद में जब सीएमसी का अधिकृत व्यक्ति नकदी लेने आया तो उन्हें पता चला कि उपरोक्त व्यक्ति एक धोखेबाज था और उसने 18,974 की राशि ले ली थी। इसके बाद कंपनी के प्रभारी ओपी भारद्वाज की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 491 और 420 के तहत मामला पंजीकृत किया। जांच के दौरान सामने आया कि दोषी एक अन्य मामले में संजौली चौकी में हिरासत में है। कंपनी के अधिकारियों की ओर से दोषी ही पहचान करने के बाद गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सितंबर 2014 को आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया गया। आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों से पूछताछ की। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर से दलीलें दी गईं। सबूतों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोषी देवराज को दंडनीय अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए सजा सुनवाई है। संवाद