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वोट से चोट पर कल फैसला ले सकता है किसान मंच

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शिमला। उपचुनावों में वोट से चोट करने के फैसले का कल संयुक्त किसान मंच ऐलान कर सकता है। मंच के पदाधिकारियों की बैठक मंगलवार को शिमला में बुलाई गई है। सेब सीजन के दौरान बागवानों के प्रति सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये से मंच के सदस्य आहत है। सीजन खत्म होने को है लेकिन अभी तक सरकार ने मंच के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए नहीं बुलाया है।
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सीजन के दौरान संयुक्त किसान मंच एपीएमसी की विफलता और कॉरपोरेट कंपनियों की मनमानी पर अंकुश लगाने की सरकार से गुहार लगाता रहा लेकिन सरकार ने नजरअंदाज किया। अब जबकि उप चुनाव नजदीक है तो मंच सरकार पर वोट से चोट करने की योजना बना रहा है। हालांकि अलग अलग राजनीतिक दलों से जुड़े बागवान संयुक्त किसान मंच के सदस्य हैं, इसलिए एक राय बनाने को बैठक बुलाई गई है। मंच के संयोजक हरीश चौहान भाजपा के सक्रिय सदस्य रह चुके हैं। उप संयोजक संजय चौहान माकपा नेता हैं। कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्त्ता भी मंच में सक्रिय हैं। जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी नीलम सरेईक संयुक्त किसान मंच की स्थापना के समय शिमला के कालीबाड़ी हॉल में हुई बैठक में शिरकत कर चुकी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह भी संयुक्त किसान मंच की मांगों को समर्थन दे चुके हैं, लेकिन जुब्बल कोटखाई से निर्दलीय प्रत्याशी चेतन बरागटा सेब चुनाव चिन्ह मिलने के बाद सेब के मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। सेब के अलावा ठियोग के सब्जी उत्पादक भी मंच के सक्रिय सदस्य हैं। शिमला जिले की जुब्बल-कोटखाई विधानसभा सेब बाहुल्य क्षेत्र है, इतना ही नहीं मंडी संसदीय सीट के तहत आने वाले शिमला जिले के रामपुर के अलावा किन्नौर, कुल्लू और मंडी जिले में भी मंच ने इकाईयां गठित कर रखी हैं।
उप चुनावों में मंच की भूमिका पर बैठक में फैसला : हरीश
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि मंच के 13 सूत्रीय मांग पत्र को लेकर अगले आंदोलन और आगामी उप चुनावों में मंच की भूमिका पर मंगलवार को होने वाली बैठक में फैसला होगा। बैठक के बाद इसका औपचारिक ऐलान भी किया जाएगा। सीजन खत्म होने को है लेकिन सरकार ने अब तक वार्ता के लिए नहीं बुलाया। एपीएमसी की नाकामी और कॉरपोरेट कंपनियों की मिलीभगत पर सरकार अब तक मौन है।
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धान खरीद में भी प्रदेश सरकार फेल, किसान परेशान : नॉटी
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक एवं भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष अनेंदर सिंह नॉटी का कहना है कि तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ किसान यूनियन ने राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को वोट से चोट का ऐलान कर रखा है। हिमाचल उप चुनावों में भी इसी नीति का पालन होगा। मौजूदा समय में भी धान की सरकारी खरीद में सही तैयारियां न करने किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। समस्याएं न सुलझी तो सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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