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हिमाचल के इन व्यंजनों का जिक्र कर लोगों के दिलों को छू गए मोदी

Thu, 27 Dec 2018 03:47 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
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हिमाचली टोपी, कांगड़ी धाम, पकवान जिमीकंद और मदरा खाने की यादों को ताजा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल के लोगों के दिलों में उतरने की कोशिश की। मंच से संबोधन शुरू करते ही मोदी ने कहा ‘हिमाचल आता हूं तो लगता है जैसे अपने घर आ गया।

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संगठन में रहते हुए मैंने हिमाचल का कोना कोना घूमा है। ऐसा कोई गांव, तहसील और जिला नहीं जहां मैं नहीं गया था। कांगड़ा से मेरा अलग जुड़ाव था।’ धर्मशाला में मोदी ने कहा ‘हिमाचल से मेरे प्रेम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मैं हर वक्त अपने बैग में हिमाचली टोपी रखता हूं।

मैने इस्राइल में भी हिमाचली टोपी पहनी तो मुझे देवभूमि के हजारों लोगों ने चिट्ठियां लिखीं।’ उन्होंने कहा कि हिमाचल को वह अपना घर मानते हैं। उन्होंने हिमाचल की शक्तिपीठों में ज्वालाजी, चामुंडा माता, चिंतपूर्णी के अलावा भीमाकाली, हिडिंबा माता आदि के मंदिरों को भी याद किया।
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जाने की जल्दी, कांगड़ी धाम न खाने का अफसोस

उन्होंने कहा कि हिमाचल वीरभूमि है। यहां के लोग शांत हैं। यहां शांति की कोख से ही अक्षुण्ण वीरता पैदा होती है। मोदी ने कहा कि कांगड़ी धाम बहुत याद आती है। कांगड़ी धाम के बारे में मोदी ने अनोखे अंदाज में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कांगड़ी धाम याद है।

इसमें माश, चने की दाल, मदरा और रंगीन चावल बहुत जायकेदार होते हैं। लोकसभा का हाउस चला हुआ है। इसी में जाने की जल्दी में कांगड़ी धाम न खाने का अफसोस रह गया है। इस पर पंडाल में बैठी हजारों लोगों ने खूब तालियां बजाईं और मोदी-मोदी के नारे लगाना शुरू कर दिए।
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रैली के बाद धौलाधार पर गिरी बर्फ, पहले मोदी ने कहा- ठीक से नजर नहीं आ रही 

मोदी ने धौलाधार की पहाड़ियों की खूबसूरती की बात की, मगर धुंध होने के कारण उन्होंने कहा कि आज यह ठीक से नजर नहीं आ रही है। धर्मशाला में इस रैली के खत्म होने के बाद धर्मशाला की इस धौलाधार पहाड़ी पर बर्फ गिरी। रैली के समय जहां से ये पहाड़ियां पहले गिरी बर्फ पिघलने के कारण चमक खोए थीं, वहीं रैली के बाद ताजा बर्फ की चादर बिछ गई।

कांगड़ी धाम न खा पाने का अफसोस : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यहां कांगड़ी धाम खाने का सुनहरा अवसर था, लेकिन समय के अभाव के चलते उन्हें बिना  कांगड़ी धाम खाए बिना ही दिल्ली लौटना पड़ रहा है। इसका उन्हें अफसोस रहेगा।
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