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जिसके नाम पर कमाया ‘पुण्य’, वही गाय आज भी ‘बेसहारा’

Thu, 27 Dec 2018 10:43 AM IST
अरविन्द ठाकुर प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
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जयराम सरकार 27 दिसंबर को एक साल पूरा करने जा रही है। इस एक साल के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जहां गो सेवा के लिए अपने पहले बजट में कई लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा की। गाय के नाम पर सरकार ने पहले ही साल में केवल शराब बेचकर पांच करोड़ से ज्यादा का ‘पुण्य’ भी कमा लिया।

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हाल यह है कि पूरे प्रदेश में गो सेवा सदन बनाने का एलान करने के बावजूद एक भी जिले में इन सदनाें के लिए जमीन तक नहीं चिह्नित की जा सकी है। यही नहीं, एक जगह बसी हुई सत्तर से ज्यादा गायों को बेघर कर नीलाम जरूर कर दिया गया।

जाहिर है कि सहारा बनने का दावा करने वाली जयराम सरकार में ही गाय ‘बेसहारा’ है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई पहली मंत्रिमंडल की बैठक में एक कैबिनेट सब कमेटी बनाई गई जिसकी सिफारिश पर बजट में गो सेवा आयोग बनाने की घोषणा की गई।

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गोमूत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की बात

 यही नहीं, गोमूत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पचास प्रतिशत निवेश अनुदान की बात कही। हिमाचल प्रदेश धार्मिक संस्थान तथा मंदिर न्यास अधिनियम में संशोधन कर चढ़ावे का पंद्रह प्रतिशत गो सदनों के निर्माण, रखरखाव व परिचालन के लिए रखने की बात कही।

शराब की हर बोतल पर एक रुपये के हिसाब से गोवंश विकास सेस, पशुओं के पंजीकरण व टैगिंग की व्यवस्था की गई। यही नहीं गोसदनों के पंजीकृत पशुओं के लिए गांव की सार्वजनिक चरागाहों की पहचान करने और एक रुपये पर गोसदन स्थापित करने के लिए जमीन देने की बात भी कही।

इसके अलावा गोसेवा के लिहाज से सर्वोत्तम पंचायत के लिए दस लाख का पुरस्कार जैसी कई लोक लुभावन योजनाएं की। लेकिन साल भर बात भी सरकार की ज्यादातर लोक लुभावन योजनाएं एलान से आगे नहीं बढ़ सकी हैं।
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जमीन चिह्नित नहीं कर सके उपायुक्त

प्रदेश सरकार के आदेश के बावजूद साल भर बाद भी जिलों के उपायुक्त गोसदन स्थापित करने के लिए अपने जिलों में जमीनें तक चिह्नित नहीं कर सके। यही नहीं, बिलासपुर में एम्स के लिए जो जमीन चिह्नित की गई, उसकी वजह से एक गोवंशीय पशु ब्रीडिंग फार्म जरूर निशाने पर आ गया।

खास बात यह है कि एम्स जैसे जनता से जुड़े संस्थान के लिए गायों को बेघर किया गया लेकिन उनके लिए भी जमीन नहीं मिल सकी और आखिर पशुपालन विभाग ने जयराम सरकार के ही राज में गायों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी।

अंतिम सत्र में लाए गोसेवा आयोग का बिल
साल भर तक गायों के नाम पर कुछ न कर पाने वाली सरकार के पास सिर्फ गो सेवा आयोग का बिल विधानसभा की दूसरे शीत सत्र में पास कराने की उपलब्धि है। यह बिल भी साल के अंतिम दिनों में पास हो पाया जो अभी भी नोटिफाई नहीं हो सका है। जाहिर है, सरकार सिर्फ एक कदम इस मामले में चल पाई लेकिन वह भी पूरा नहीं हो सका है।
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