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हिमाचल: किन्नौर में हांगों पंचायत के युवकों ने बना दिया कृत्रिम ग्लेशियर, नहीं होगी पानी की समस्या

Sat, 13 Jan 2024 07:27 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, रिकांगपिओ (किन्नौर)

सार

हांगो गांव के लोगों ने लद्दाख के भारतीय सिविल इंजीनियर चेवांग नोरफेल की ओर से बनाए गए कृत्रिम ग्लेशियर की तकनीक को अपनाकर यह कमाल किया।
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कृत्रिम ग्लेशियर बनाया - फोटो : संवाद
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विस्तार
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इरादे पक्के और हौसले बुलंद हों तो मुश्किल काम भी आसान हो जाता है। ऐसा ही संभव कर दिखाया है किन्नौर के युवाओं ने। बर्फबारी नहीं होने से किन्नौर जिले में लंबे समय से सूखे की मार से किसानों और बागवानों को परेशानी में डाल दिया है। आगामी सीजन में सिंचाई की समस्या न हो, इसके लिए पूह खंड की हांगों पंचायत के युवकों और ग्रामीणों ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने सूखे नाले में पानी डालकर कृत्रिम ग्लेशियर तैयार किया है। हांगो गांव के युवकों ने पाइप से पानी लाकर नाले में गिराकर ग्लेशियर बनाने का एक अनोखा तरीका निकाला है। युवकों ने यह तरीका लद्दाख के भारतीय सिविल इंजीनियर चेवांग नोरफेल के बनाए कृत्रिम ग्लेशियर को देखकर अपनाया। 

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लेह के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले नोरफेल विज्ञान के छात्र के रूप में श्रीनगर के अमर सिंह कॉलेज गए । उन्होंने 1960 में लखनऊ से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स पूरा किया। जून 1960 में वह सिविल इंजीनियर के रूप में लद्दाख में जम्मू और कश्मीर के ग्रामीण विकास विभाग में शामिल हो गए। वह 1995 में सेवानिवृत्त हुए। लद्दाख के इस सिविल इंजीनियर हैं ने 15 कृत्रिम ग्लेशियर बनाए हैं। उन्हें द आइस मैन ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने ने एक छोटे नाले को घाटी में मोड़कर चेक डेम बनाकर पानी की धारा को धीमा करके कृत्रिम ग्लेशियर बनाएं। कृत्रिम ग्लेशियर भूजल पुनर्भरण को बढ़ाते हैं, झरने को पुनर्जीवित करते हैं और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराते हैं।

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120 किसान और बागवान होंगे लाभान्वित
कृत्रिम ग्लेशियर से यहां के करीब 120 किसान और बागवान लाभान्वित होंगे। यहां आलू, मटर आदि नकदी फसलें अधिक मात्रा में उगाई जाती हैं। सेब की पैदावार भी होती है।

नहीं होगी पानी की समस्या
हांगो पंचायत की प्रधान सूरजमणी ने बताया कि हर साल गांव में सिंचाई के लिए पानी की समस्या होती है। लेकिन इस बार बर्फबारी न होने से गर्मियों में पानी का संकट और गंभीर होगा। इन सभी समस्याओं को देखते हुए युवकों और ग्रामीणों ने नाले में कृत्रिम ग्लेशियर तैयार किया है। इसके लिए सभी युवा और ग्रामीण बधाई के पात्र हैं। इस कृत्रिम ग्लेशियर से ग्रामीणों को खेतीबाड़ी में सिंचाई करने के लिए पानी की समस्या नहीं होगी।
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