फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार के स्कूल खोलने के फैसले का विरोध जारी

विज्ञापन
विज्ञापन
राजधानी में विभिन्न स्कूलों के अभिभावक हुए एकजुट, सरकार से राहत की मांग
विज्ञापन

क्रॉसर
अभिभावक बोले, पहले बच्चों की सुरक्षा जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश सरकार के स्कूलों में सभी छात्रों की कक्षाएं शुरू करने के फैसले को लेकर अभिभावकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बच्चों की जान की सुरक्षा की चिंता कर रहे अभिभाव अलग-अलग तरीके से विरोध दर्ज कर रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि सालभर बच्चे घरों में रखे, अब सत्र के अंतिम दस दिन में बच्चों को स्कूल बुलाने का फैसला गलत है। बच्चों को कुछ हुआ तो कौन जिम्मेदारी लेगा। राजधानी शिमला के डीएवी न्यू शिमला, चैल्सी, चैप्सली सहित अन्य निजी स्कूलों के अभिभावकों और निजी स्कूल पेरेंटस एसोसिएशन में शामिल दर्जनों अभिभावकों ने अनिल गोयल की अगुवाई में वीरवार को उपायुक्त शिमला से मुलाकात की और उन्हें मांगपत्र सौंपा। अभिभावक रेणू, प्रीति गौतम, रिता चौहान, बबीता, विक्रम सिंह, रविंद्र सहित उपायुक्त से मिलने पहुंचे।
विज्ञापन

बच्चे कोई टेस्ट किट नहीं
शिमला। अभिभावकों ने कहा कि प्रदेश सरकार कम से कम शीतकालीन स्कूलों में जहां ऑनलाइन पूरा पाठ्यक्रम पढ़ा दिया है वहां पहली से सातवीं तक की ऑफलाइन कक्षाएं लगाने का फैसला वापस लें। महज दस दिनों के लिए लगाई जाने वाली इन कक्षाओं से छोटे बच्चों के संक्रमित होने का अधिक खतरा है। अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चे कोई टेस्ट किट नहीं हैं जिन्हें हम बिना वैक्सीनेशन के स्कूल भेज दें। बच्चों की जान की सुरक्षा सबसे अहम है, यदि यह फैसला नहीं बदला तो भी वह अपने छोटे बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
अनिल गोयल और अन्य अभिभावकों ने कहा कि पहले की तरह से सत्र के शेष बचे दस से बारह दिन ऑनलाइन ही कक्षाएं चलाई जाएं और ऑनलाइन ही परीक्षाएं लें। इसलिए सरकार शीतकालीन स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने का फैसला लागू न करें।
छोटे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए
फैसला बदलें जयराम : अभिभावक
बच्चों के अभिभावकों ने डीसी के माध्यम से सीएम को भेजा पत्र
बोले, सत्र के अंतिम दिनों में नहीं उठा सकते वर्र्दी का खर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अभिभावकों ने उपायुक्त के माध्यम से सरकार को भेजे मांगपत्र में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की कि बच्चों की जिंदगी उनकी सुरक्षा के साथ अभिभावकों की समस्या को ध्यान में रखते हुए महज दस दिनों के लिए बच्चों को स्कूल बुलाने का फैसला वापस लें। प्रीति गौतम, रिटा चौहान और रेणू ने कहा कि सरकार का यह फैसला किसी भी अभिभावक को मंजूर नहीं है।
कोरोना के कारण बिगड़े आर्थिक हालात और कम हुई कमाई को देखते हुए सरकार निजी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के लिए कहे। कुछ स्कूल अभी भी पूरे सत्र में स्कूल खोले बिना ही बिजली, पानी सहित अन्य खर्च वसूल रहे हैं। सत्र के अंत में अभिभावक किसी भी तरह से वर्दी, परिवहन और अन्य पड़ने वाले खर्च को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं।
ऑकलैंड ब्वॉयज स्कूल के
बाहर किया मौन प्रदर्शन
शिमला। राजधानी के ऑकलैंड ब्वॉयज स्कूल के बाहर आठवीं और नौवीं कक्षा के छात्र छात्राओं के अभिभावकों ने परीक्षा सहित अन्य मुद्दों को लेकर वीरवार को स्कूल के बाहर अभिभावक मंच के बैनर तले मूक प्रदर्शन किया।
विज्ञापन

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में जुटे अभिभावकों में कशिश राणा, अरुणा चावला, प्रीति पुंटा, रितिका, कुसुमलता राणा, शिखा नाग मौजूद रहीं। अभिभावकों ने स्कूल प्रधानाचार्य से मुलाकात की और आठवीं तथा नौवीं की परीक्षाओं तथा कक्षाओं को लेकर चरचा की। छात्र-अभिभावक मंच के संयोजक एवं ऑकलैंड हाउस स्कूल पीटीए के सदस्य विजेंद्र मेहरा ने बताया कि 14 नवंबर के बाद आठवीं और नौवीं कक्षा की होने वाली वार्षिक परीक्षाएं अब 25 नवंबर से शुरू होंगी। छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए हर परीक्षा के बीच एक दिन की छुट्टी दी जाएगी। आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की परीक्षाओं के लिए तय पाठ्यक्रम में कटौती करने की मांग उठाई। उन्होंने सरकार और प्रशासन को चेताया कि अगर छात्रों तथा अभिभावकों पर जबरदस्ती स्कूल आने का निर्णय थोपा तो इसके खिलाफ उग्र आंदोलन होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें