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नहीं बरसे बादल: कुल्लू में मटर की 60 फीसदी फसल बर्बाद, किसानों को उठाना पड़ रहा नुकसान

Mon, 11 Apr 2022 11:07 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमीचंद भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू/खराहल

सार

नमी कम होने से फसलें सूखनी शुरू हो गई हैं। अगर कुछ दिन और बारिश नहीं होती है तो नुकसान का आंकड़ा तेजी से बढ़ जाएगा।
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मटर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कुल्लू जिले में पिछले डेढ़ माह से बारिश नहीं हुई है। ऐसे में खेतों में बिना नमी के रबी फसलें सूखने लगी हैं। एक सप्ताह के भीतर बारिश नहीं हुई तो नुकसान और अधिक हो सकता है। जिले में नगदी फसल मटर का सीजन अमूमन अप्रैल के पहले पखवाड़े में शुरू हो जाता है। इस बार लगभग 60 फीसदी हरे मटर की फसल सूखे के कारण बर्बाद हो गई है। इस कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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किसानों के लिए बीज, खाद, दवाओं और मजदूरी का खर्चा निकलना भी मुश्किल हो गया है। बता दें कि जिले में 2500 हेक्टेयर में किसान मटर का उत्पादन कर रहे हैं। असिंचित क्षेत्रों में मटर की फसल को अधिक नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि प्रचंड गर्मी के चलते खेतों की नमी पर प्रभाव नहीं पड़ रहा है। नमी कम होने से फसलें सूखनी शुरू हो गई हैं। अगर कुछ दिन और बारिश नहीं होती है तो नुकसान का आंकड़ा तेजी से बढ़ जाएगा।

किसान अमित ठाकुर, ज्ञान ठाकुर, अनूप ठाकुर, रोशन लाल, रविंद्र शर्मा, अशोक ठाकुर, महेश, चमन और सुरेश ने कहा कि खेतों में नगदी फसल हरा मटर सूखे की चपेट में आई है, जिससे किसान बैकफुट पर आ गए हैं। किसान सभा उपाध्यक्ष देवराज नेगी और कृषि विकास संघ के प्रधान ज्ञान ठाकुर ने कहा कि सूखे की वजह से मटर के अलावा गेहूं, जौ और साग-सब्जियों को भी क्षति पहुंची है।
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उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक पंजवीर ठाकुर ने कहा कि मटर अधिक संवेदनशील फसल है। ऐसे में अन्य रबी फसलों के मुकाबले मटर की फसल अधिक मात्रा में सूखे की चपेट में आई है। कहा कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा है, उन क्षेत्रों में किसान शाम के समय सिंचाई करें।

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