नंबर आया तो बंद हो गया काउंटर, आईजीएमसी में परेशान हुए मरीज
बाद में निजी लैब में करवाने पड़े मरीजों को टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) की सरकारी लैब में जांच करवाने आए मरीजों को सोमवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि मरीज और उनके तीमारदार पहले तो घंटों काउंटर पर टेस्ट ट्यूब लेने के लिए खड़े रहे और उसके बाद जब नंबर आया तो काउंटर बंद हो गया। दरअसल एक बजे तक ही आईजीएमसी में टेस्ट होते हैं, इसलिए इसके बाद ट्यूब नहीं दी जाती है। लाइन लंबी होने के कारण जिन मरीजों का नंबर एक बजे तक नहीं आया उन्हें टेस्ट ट्यूब नहीं मिल पाई।
आईजीएमसी के 302 नंबर काउंटर पर सोमवार को मरीजों की खूब भीड़ उमड़ी। लेकिन जैसे ही एक बजे काउंटर पर तैनात कर्मियों ने कहा कि अब निजी क्रस्ना लैब में जाकर जांच करवाए। इस बात से भड़के मरीज और तीमारदारों ने कहा कि वह काफी देर से लाइनों में खड़े हैं इसलिए उन्हें ट्यूब दी जाए। इस दौरान उनकी हलकी बहसबाजी भी हो गई। तीमारदार सुनील, हुकम सिंह, नेहा ने कहा है कि जब मरीजों के टेस्ट फ्री हैं तो उन्हें टेस्ट ट्यूब भी मुफ्त में दी जाए। शाम चार बजे तक अस्पताल में 3,519 मरीजों ने उपचार करवाया। इसमें 3,405 जनरल मरीजों ने विभिन्न ओपीडी और 114 मरीजों ने आपात स्थिति में उपचार करवाया। इनमें उल्टी, बुखार तथा बाजू दर्द के मरीज शामिल हैं।
ट्यूब लेने में बीत जाता है पूरा दिन
ओपीडी में चेकअप के बाद चिकित्सक लिवर, किडनी, शुगर, थायरायड समेत चार से पांच प्रकार के टेस्ट लिखते हैं। इनमें सबसे पहले मरीज फार्म भरवाता है। इसके बाद ट्यूब काउंटर पर खड़ा हो जाता है। इसके बाद मरीज सरकारी लैब में टेस्ट करवाने के लिए पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज का आधा दिन बीत जाता है। ऐसे में अगर फार्म के बाद सीधे ही सरकारी लैब में निजी लैब की तरह ट्यूब मुहैया करवाई जाए तो मरीजों को कोई दिक्कत नहीं होगी।
निजी लैब में भी होना पड़ रहा परेशान
शिमला। आईजीएमसी परिसर में खुली निजी क्रस्ना लैब में दोपहर एक बजे से सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच से पहले पर्ची की दो फोटो स्टेट कॉपी लैब संचालकों द्वारा रिकार्ड के लिए ली जा रही हैं। सोमवार को मरीज एक-एक फोटो स्टेट कॉपी लेकर आए थे जब कर्मियों ने एक और फोटो कॉपी लेने के लिए कहा तो फिर जाना पड़ा। इसके बाद मरीजों को दोबारा से लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा। जांच रिपोर्ट भी मरीजों को दो से तीन दिन बाद मिल रही है।
ध्यान में है मामला: डॉ. साद
आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. साद रिजवी ने बताया कि मामला ध्यान में है। मरीजों को परेशानी पेश न आए इसके लिए उच्च अधिकारी से सलाह ली जाएगी।