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पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर तैयार

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हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव इस बार के आरक्षण को तय करने का आधार होंगे। आरक्षण का क्रम एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और सामान्य श्रेणी का रहेगा। वर्ष 2015 के चुनाव को 2010 में तय आरक्षण के बाद दूसरा रोटेशन माना जाएगा। राज्य पंचायती राज विभाग ने इस बार पंचायत चुनाव के मद्देनजर आरक्षण का रोस्टर तय कर लिया है। इसी फार्मूले को जिलों को जारी किए गए सॉफ्टवेयर में डाला गया है।
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जहां सीटें आरक्षित थीं, वहां संबंधित श्रेणी को आरक्षण की पुनरावृत्ति नहीं की जाएगी। जहां आरक्षण दिया जाना शेष है, वहां वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाकर जनसंख्या को लिया जाएगा। वर्ष 2010 में हुए चुनाव में हर ब्लॉक में सबसे पहले कुल जनसंख्या देखी गई। उसके बाद अनुसूचित जाति की जनसंख्या की प्रतिशतता निकाली गई। इस प्रतिशतता से जितने पद निकले, उतने ही ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व किए गए।

ब्लॉक की जनसंख्या को बनाया आधार

इनमें भी जितनी प्रतिशतता महिलाओं की थी, उतने ही पद अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए। यही फार्मूला एसटी, ओबीसी, महिला और सामान्य श्रेणी के लिए भी लगाया गया। अब पिछले आरक्षण को रोटेट किया जा रहा है। जहां पिछली बार अनुसूचित जाति के लिए सीटें आरक्षित थीं, वहां दूसरी अधिक जनसंख्या वाली श्रेणी को अवसर दिया जाएगा। अनुसूचित जाति महिला वाली सीट पर अनुसूचित जाति को नहीं बल्कि पहले एसटी, फिर ओबीसी, फिर महिला और उसके बाद सामान्य वर्ग को अवसर दिया जाएगा।

पंचायती राज विभाग, हिमाचल प्रदेश के संयुक्त निदेशक केवल शर्मा ने बताया कि ब्लॉक की जनसंख्या को आधार बनाकर ही पंचायतों में आरक्षित सीटें तय की जा रही हैं। जिलों को दिए गए सॉफ्टवेयर में यही फार्मूला है। एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और सामान्य वर्ग के क्रम से ही आरक्षण मिलेगा।
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ये है फॉर्मूला

•मान लीजिए किसी ब्लॉक में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 25 प्रतिशत है, तो इस ब्लॉक में कुल जितनी पंचायतें हैं, उनमें भी 25 प्रतिशत सीटें ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होंगी।
•अनुसूचित जाति की इस जनसंख्या में भी अगर 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति की महिलाएं हैं तो इतनी ही सीटें इनके लिए रिजर्व होंगी।
•जहां ये 25 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति के लोगों के लिए वर्ष 2010 में आरक्षित हुई थीं, उन पंचायतों को छोड़कर 2015 के चुनाव की पहली रोटेशन में अब पिछली बार अनुसूचित जाति के आरक्षण से बाहर रही पंचायतों की कुल जनसंख्या ली जाएगी।
•इनमें फिर अनुसूचित जाति की जनसंख्या को गिना जाएगा, इनकी प्रतिशतता के हिसाब से इन्हीं ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जाति की सीटों को आरक्षित किया जाएगा।
•यह रोटेशन अगले चुनाव में तब तक चलेगा, जब तक हर पंचायत में अनुसूचित जाति को आरक्षण न मिल जाए, यही फार्मूला क्रमश: एसटी, ओबीसी, महिला और सामान्य वर्ग के क्रम में होगा।
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