कालका शिमला विश्व धरोहर पर दौड़ने वाली टॉय ट्रेन को खिलौना समझने की सैलानी भूल न करें। मस्ती, रोमांच और उत्साह का सफर पल भर में मातम में बदल सकता है। 20 किमी की धीमी रफ्तार से चलने वाली ट्रेन अंधे मोड़ों में घातक साबित हो सकती है। सैलानियों की जरा सी लापरवाही उनकी जान को जोखिम में डाल सकती है।
शनिवार को ब्रिटिश नागरिकों से भरी चार डिब्बों वाली चार्टर्ड ट्रेन पटरी से उतर गई। रेलवे का तकनीकी विभाग हादसा का कारण तीखा मोड़ बता रहा है। वहीं, चार डिब्बों वाली रेल में तेज रफ्तारी भी इस हादसे का कारण है, इसे नकारा नहीं जा सकता। रेलवे विभाग सफाई में यह तर्क दे रहा है कि जब पटरी से डिब्बे उतरे तो दोनों डिब्बों में मौजूद अधिकांश सैलानी दरवाजे वाली साइड खड़े थे। जिस कारण ट्रेन अनियंत्रित होकर पटरी से उतरी। रेलवे विभाग के इस तर्क को नकारा नहीं जा सकता।
अकसर पैसेंजर ट्रेन में लोग तीखे मोड़, टनल और ठंडी हवाओं के साथ शांत फिजाओं का नजारा देखने दरवाजों में खड़े हो जाते हैं। यही नहीं जान जोखिम में डालकर खिड़कियों से बाहर और दरवाजों पर खड़े होकर फोटोग्राफी भी करते हैं। तो कुछ तो ट्रेन को टॉय समझकर सर्पीले ट्रैक पर रेल के दरवाजों में ही बैठ जाते हैं। जो जाने अनजाने हादसे का शिकार होते हैं। हालांकि, रेलवे पुलिस समय समय पर चालान काटती है, लेकिन इसपर रोक नहीं सकती है।
तो इस वजह से हुआ ये हादसा
फोटो खींचते खींचते गिरीं बाहर- जिस कोच में दो विदेशी महिलाओं ने अपनी जान गंवाई हैं, वहां किसी गार्ड की तैनाती नहीं थी। प्रतिबंध के बावजूद दोनों खड़े होकर फोटग्राफी कर रही थीं। जैसे ही रेल पटरी से उतरी तो विदेशी महिला अनियंत्रित होकर तेज गति में बाहर जा गिरीं। उसे पकड़ते पकड़ते दूसरी विदेशी महिला पहाड़ और कंटीली झाडियों की चपेट में आ गई और मौत की आगोश में समां गई।
20 किमी प्रतिघंटे की थी रफ्तार- प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसा तेज रफ्तारी से हुआ है। ट्रेन का इंजन नया था। लिहाजा हादसे से पहले काफी तेज गति से रेल चल रही थी। उधर, गाड़ी के चालक धन सिंह का कहना है कि 20 साल से इस लाइन पर रेल चला रहा हूं। उसका कहना है कि स्पीड कंट्रोल में थी। मोड़ मुड़ते ही हादसा हो गया।
विश्व पर्यटन को दिया जख्म
विश्व धरोहर शिमला कालका रेलवे ट्रैक पर यह हादसा विश्व पर्यटन को गहरा जख्म दे सकता है। ब्रिटिश सिटिजन से भरी चार्टर्ड ट्रेन के डिब्बों का यूं पटरी पर से उतर जाना रेलवे विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। लापरवाही और असुरक्षा से 112 साल पुरानी हिमाचल की ऐतिहासिक धरोहर की न केवल छबि खराब हुई है, ब्लकि टॉय ट्रेन के रोमांच का लुत्फ उठाने वाले सैलानियों को भी भयभीत कर गई है। नए इंजन के साथ चार डिब्बों को जोड़कर सुंदर तो बना दिया।
लेकिन, सुरक्षा के बेहतर इंतजाम पुख्ता करना रेलवे विभाग शायद भूल गया। चार डिब्बों में सुरक्षा की जिम्मेदार महज 02 टूरिस्ट गाइडस को दी गई। जबकि, सुरक्षा गार्ड की तैनाती किसी भी टूरिस्ट कैबिन में नहीं की गई। उधर, उपायुक्त सोलन मदन चौहान ने घटास्थल का दौरा किया। मौके पर डीएम रेलवे, डीएसपी परवाणू प्रमोद चौहान भी मौजूद रहे।
रेलवे अधिकारियों से स्थानीय प्रशासन घटना का कारण जानते रहे, लेकिन कोई स्पष्ट कारण रेलवे विभाग नहीं बता सका। रेलवे विभाग के मुताबिक रेल पूरे मापदंडों के साथ सही गति और व्यवस्थित तरीके से गंतव्य की तरफ जा रही थी कि तीखे कर्व के चलते यह हादसा हुआ।
50-60 के दशक में हुआ था बड़ा हादसा
बताया जा रहा है कि इससे पहले बड़ा हादसा 50- 60 के दशक में हुआ था। जतोग के पास घटना में कुछ जानें भी गई थीं। इस दौरान रेलवे ट्रैक कई दिन तक बंद रहा था। जिसकी तस्वीरें आज भी बड़ोग स्टेशन में लगी हुई हैं।
ट्रैक पर एक नजर- कालका शिमला रेलवे 02 फीट 06 इंच (762 मीमी) नैरोगेज है। शिमला तक यह संकरा पहाड़ी भरा ट्रैक है। इस रेल लाइन में 864 ब्रिज हैं। 919 तीखे मोड़ हैं। सबसे नैरो मोड 48 डिग्री का है, जहां यह हादसा हुआ है।
डीएम रेलवे दिनेश कुमार ने कहा कि कमिश्नर स्तर का अधिकारी मामले की जांच करेगा। दो ब्रिटिश नागरिकों की हालत गंभीर बनी हुई है। मैक्स अस्पताल मोहाली में इनका इलाज चल रहा है। अन्य को वैला विस्टा होटल में ठहराया गया है।