जिला कांगड़ा के नूरपुर के चेली में बीते 9 अप्रैल को छुट्टी के बाद घर छोड़ने जा रही 42 सीटर स्कूल बस 700 फीट गहरी खाई में गिर गई थी। इस हादसे में 24 बच्चों समेत कुल 28 लोगों की जान गई थी। उस समय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि तेज रफ्तार बाइक को बचाने के चक्कर में यह हादसा हुआ है।
इस टीम ने की जांच- एडीएम मस्त राम भारद्वाज, डीएसपी नूरपुर नवदीप सिंह, एचआरटीसी के डीएम राजकुमार जरियाल, एमबीआई पंकज शर्मा और पीडब्ल्यूडी के अस्सिटेंट इंजीनियरिंग मेकेनिकल विकास शर्मा
नूरपुर स्कूल बस हादसे में घायल बच्चे एक महीने बाद भी नहीं जानते हैं कि उनके साथी अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्हें इस बारे में नहीं बताया गया है। घायल बच्चे अस्पताल से छुट्टी के बाद घर में ही रह रहे हैं। वे अभी सदमे से नहीं उबर पाए हैं।
इनके परिजनों का कहना है कि ये अकसर अपने साथियों के बारे में पूछते हैं, लेकिन इनसे इस बात को छिपाकर रखा गया है। चेली गांव में हादसे के एक माह बाद भी ट्रक और स्कूल बस का मलबा खाई में ही पड़ा हुआ है। घटनास्थल पर सड़क किनारे बच्चों की याद में मंदिर भी बनाया गया है।
उधर, बस हादसे की जांच के लिए बनाई कमेटी ने भले ही अपनी रिपोर्ट में मानवीय भूल को हादसे का कारण बताया हो, लेकिन पीड़ित परिजन इससे संतुष्ट नहीं हैं। विक्रम सिंह, राजेश कुमार, कर्ण सिंह, नरेश सिंह, रघुनाथ, दिलदार सिंह और चग्गर सिंह ने कहा कि दुर्घटनाग्रस्त स्कूल बस काफी पुरानी थी।
इस बस में पहले भी हादसे हो चुके थे। आरोप लगाया कि बस के चेसी नंबर से छेड़छाड़ की गई है। चेसी नंबर के ऊपर प्लेट लगाई गई है। दुर्घटनाग्रस्त बस से बरामद बस रूट का साइन बोर्ड इस बात का सबूत है कि बस को पहले कोई निजी बस ऑपरेटर चलाता था। ऐसे में हादसे को सिर्फ और सिर्फ मानवीय भूल का नाम देना कहां तक मुनासिब है।