हिमाचल प्रदेश में 16 अगस्त 2011 के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास करने वाले अभ्यर्थियों को सरकार ने बड़ी राहत दे दी है। सरकार ने सात वर्ष की जगह उम्र भर के लिए टेट के योग्यता प्रमाणपत्र की वैधता तय कर दी है। राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस बाबत लिखित निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश के लाखों अभ्यर्थी इस फैसले से लाभान्वित होंगे। अभी तक टेट पास करने पर उम्मीदवार सात वर्ष तक नौकरी के लिए पात्र होता था।
इसके बाद उसे शिक्षक बनने के लिए दोबारा परीक्षा देनी पड़ती थी। केंद्र और राज्य एनसीटीई नियमों से टेट करवाते हैं। केंद्र सरकार के लिए सीबीएसई और राज्य अपनी परीक्षा खुद करवाते हैं। सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक लाभ महिलाओं को होगा। दरअसल, शादी और बच्चों के चलते वे नौकरी छोड़ देती थीं। अब दोबारा आसानी से नौकरी पा सकेंगी। शिक्षक पात्रता परीक्षा उम्र भर के लिए मान्य करने के लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन ने बीते दिनों राज्यों को लिखित निर्देश जारी किए थे।
इसी कड़ी में प्रदेश सरकार ने मंगलवार को इसे लागू करने का फैसला लिया है। सोमवार को जारी आदेशों में बताया गया है कि शिक्षा विभाग में उन सभी शिक्षक संवर्गों जिनके भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार टेट अनिवार्य है को इस फैसले का लाभ मिलेगा। उधर, हिमाचल प्रदेश में शिक्षक बनने के लिए सभी श्रेणियों का भी टेट पास होना इसी वर्ष से अनिवार्य कर दिया जाएगा। अभी जेबीटी और टीजीटी के लिए ही शिक्षक पात्रता परीक्षा का पास होना जरूरी है। प्रवक्ता, डीपीई सहित कई अन्य श्रेणियों को भी टेट के दायरे में लाने की सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में नई व्यवस्था लागू करने के लिए शिक्षा विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसे आने वाले महीनों में मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा।