राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए राहत भरा आदेश जारी किया है। अब प्रदेश के सभी अधिकारी अपने तैनाती वाले स्थान पर भी अचल संपत्ति खरीद सकेंगे। हालांकि, इसके लिए उन्हें राज्य सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
साथ ही अगर परिवार के किसी सदस्य के नाम पर भी संपत्ति खरीदी जाती है तो उसके लिए भी अनुमति लेना अनिवार्य होगा। भ्रष्टाचार कम करने और अधिकारियों का ध्यान सिर्फ अपने काम पर रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कुछ साल पहले तक अधिकारियों पर अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी तरह की अचल संपत्ति खरीदने पर पाबंदी लगा दी थी।
इस पाबंदी के चलते वह न तो खुद और न ही परिवार के किसी सदस्य के नाम से अपने कार्यक्षेत्र में संपत्ति खरीद सकते थे, लेकिन विभिन्न विभागों के अधिकारियों की ओर से इस मसले पर सवाल उठाए जाने के बाद सरकार ने फिर इस पर से पाबंदी हटा दी है। मुख्य सचिव की ओर से सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, सभी विभागाध्यक्षों और सभी उपायुक्तों को इस संदर्भ में निर्देश जारी किए गए हैं।
कहा गया है कि 12 जनवरी 1996 के निर्देशों के तहत अपने कार्यक्षेत्र में संपत्ति न खरीदने के लिए पाबंद किए गए अधिकारी अब अपने कार्यक्षेत्र में ही अपने या परिवार के किसी सदस्य के नाम से संपत्ति खरीद सकेंगे। हालांकि, इस खरीद से पहले उन्हें राज्य सरकार से लिखित में अनुमति लेना आवश्यक होगा।