आयोग ने निजी संस्थानों से स्टाफ की संख्या, उनको दिए जाने वाले वेतन, बायोमीट्रिक हाजिरी, सिक्योरिटी राशि के रिफंड, विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत आवेदनों की जांच करने को गठित कमेटियों और शिक्षकों की डिग्रियों की वेरिफिकेशन से संबंधित जानकारी मांगी है।
इसके अलावा सेनेटरी नैपकिन मशीनें लगाने, एड्स की जागरूकता संबंधी अभियानों, प्रोस्पेक्टस और आयोग द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों के पालन के संदर्भ में जानकारी मांगी है।
आयोग के सचिव एसडी नेगी ने बताया कि 15 दिनों के भीतर जो संस्थान जानकारी नहीं देंगे, उनके खिलाफ निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग एक्ट 2010 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि एक्ट 2010 के तहत संस्थानों की मान्यता रद्द करने से लेकर भारी जुर्माना किए जाने का प्रावधान है।