दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन के पहले अश्वेत आर्कबिशप और चर्च के बिशप नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेसमंड टुटू शनिवार दोपहर को अपने खास दोस्त धर्मगरु दलाईलामा से मिलने मैकलोडगंज पहुंचे। हवाई अड्डा कांगड़ा में दलाईलामा और निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्ये ने टुटू का गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट पहुंचने पर टुटू ने अनौपचारिक वार्ता में कहा कि दलाईलामा को तीन बार दक्षिण अफ्रीका सरकार की ओर से वीजा न दिए जाने का उन्हें बहुत दुख है।
कुछ द्वेष उन्हें दलाईलामा से दूर रखना चाहते हैं, लेकिन उनका आपस का प्रेम उन्हें बार-बार धर्मगुरु से मिलवा ही देता है। हम चाहते हैं कि विश्व में शांति बने। टुटू ने कहा कि जब नेल्सन मंडेला राष्ट्रपति थे तो दलाईलामा दक्षिण अफ्रीका आए थे लेकिन पता नहीं उसके बाद हमारी सरकार को क्या हो गया है। वीजा विवाद के दौरान मैंने दलाईलामा से पूछा था कि चीन को आपसे खतरा क्यों है।
तब दलाईलामा ने कहा था कि मुझे इस बात की हैरानी नहीं है क्योंकि आध्यात्मिक लोगों से संभल कर व्यवहार करना चाहिए। वहीं धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि टुटू उनके खास दोस्त हैं। टुटू की सेहत ठीक नहीं है फिर भी वह मुझे मिलने के लिए आ रहे हैं, इसके लिए वह उनके आभारी हैं।