सरकारी कर्मचारी कानून के प्रावधानों, विभागीय नियमों और निर्देशों से नियंत्रित होते हैं। अनुशासन हर कर्मचारी के लिए अनिवार्य है। यदि कर्मचारी खुद को अनुशासन में रखने के लिए तैयार नहीं है तो जाहिर है कि वह न केवल अपने नियोक्ता के क्रोध को आमंत्रित करता है बल्कि कम से कम विभागीय रूप से कार्यवाही के लिए भी उत्तरदायी होता है। हिमाचल हाईकोर्ट ने फैसले में 17वीं शताब्दी में कहे चर्चमैन थॉमस फुलर के अमर शब्दों का उल्लेख करते हुए लिखा ‘तुम चाहे कितने ऊंचे बनो, कानून तुमसे ऊपर है’।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने यह टिप्पणी असिस्टेंट कमिश्नर टैक्स एंड एक्साइज के मामले में की, जो 6 जनवरी 2019 से 7 मार्च 2019 तक की अवधि का अर्जित अवकाश स्वीकार करने बाबत राज्य सरकार को निर्देश दिए जाने की गुहार लगा रही थीं। न्यायालय ने कहा कि हर एक कर्मचारी को अपने नियोक्ता के प्रति वफादार और अनुशासित होना चाहिए, जिसमें प्रार्थी विफल रही। न्यायालय ने कहा कि एक कर्मचारी से न केवल अपेक्षा की जाती है बल्कि उसे कानून से बाध्य किया जाता है कि वह कार्यालय में शिष्टाचार और अनुशासन बनाए रखे। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में प्रार्थी के पास कोई वैध कारण नहीं था कि वह किस कारणवश ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं कर सकीं।