विधेयक में किए गए प्रावधानों के तहत चिट्टा तस्करी, नकली शराब बेचने और इस तरह के अन्य संगठित अपराध से यदि किसी की मौत होती है तो दोषियों को आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक मिल सकता है। सजा के साथ दोषी को 10 लाख रुपये तक जुर्माना भी देना होगा। नशे से अर्जित की गई संपत्ति भी जब्त होगी।
विधेयक में संगठित अपराध के लिए उकसाने, प्रयास करने, षड्यंत्र रचने, जानबूझकर अंजाम देने में मदद करने वालों को भी कम से कम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया है जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें पांच लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। संगठित अपराध गिरोह के सदस्य को कम से कम एक साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। बीस हजार और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी देना होगा।
नशे के अलावा अवैध खनन, वन कटान, वन्य जीवों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग, मानव अंगों की तस्करी, स्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल बनाने, झूठे क्लेम करने, साइबर आतंकवाद, फिरौती, फर्जी दस्तावेज रैकेट, खाने की वस्तुओं में मिलावट और मैच फिक्सिंग के मामले भी संगठित अपराध कहलाएंगे।