सेब सीजन में ढुलाई के लिए आ रहे ट्रकों के जाम से निजात दिलाने के लिए नेशनल हाईवे के किनारे नई शिमला सब्जी मंडी बनेगी। सीजन में ढुलाई को आने वाले ट्रकों और अन्य छोटे माल वाहक वाहनों के जाम से निजात भी मिलेगी। बागवानों की तैयार सेब फसल को देश की मंडियों तक पहुंचाने में कोई परेशानी भी नहीं होगी। वर्तमान में बागवानों को सेब की फसल बेचने में कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
मंडियों तक सेब पहुंचाने में पहले बागवानों को जाम का सामना करना पड़ रहा है और फिर मंडियों में फसल बेचने के लिए खासी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में कई बार सेब की फसल ज्यादा पक जाती है और फिर सेब के दाम अपेक्षाकृत कम मिलते हैं।
बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने बागवानों की इस सब दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए शिमला की नई सब्जी मंडी का निर्माण करना है। सरकार ने नई सब्जी मंडी निर्माण को जमीन की तलाश शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि शिमला सब्जी मंडी के लिए दाड़नी के बगीचे की जमीन पर भी विचार किया जा चुका है, लेकिन यह मामला सिरे नहीं चढ़ा। अब नेशनल हाईवे के किनारे सब्जी मंडी के लिए तलाश जोरों से की जा रही है।
ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले हजारों सेब के ट्रकों और छोटे वाहनों के कारण ढली सब्जी मंडी और भट्ठाकुफर मंडी भी छोटी पड़ गई है। इस कारण से सेब से लदे ट्रकों और छोटे वाहनों को कई घंटों तक अनलोडिंग के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इन सेब से लदे वाहनों के नेशनल हाईवे पर खड़े होने से जाम की समस्या आम हो गई है और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य के कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि शिमला की नई सब्जी मंडी नेशनल हाईवे के किनारे बनाई जानी है। इसके लिए दाड़नी के बगीचे की जमीन देखी गई थी, लेकिन यह उपयुक्त नहीं पाई गई है। शिमला के समीप एनएच के किनारे जमीन तलाशी जा रही है।