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कारोबारियों की मदद के लिए राहत कोष का गठन करेगा व्यापार मंडल

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शिमला में व्यापार मंडल की बैठक में भाग लेते व्यापारी।
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शिमला। राजधानी में बने समानांतर व्यापार मंडल ने शहर के कारोबारियों के लिए राहत कोष बनाने का ऐलान किया है। कारोबारियों को संकट के समय इस कोष से मदद दी जाएगी। शहर के कारोबारियों से सदस्यता शुल्क लेकर यह कोष भरा जाएगा। सदस्यता शुल्क कितना रहेगा, इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा।
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संजीव ठाकुर की अगुवाई वाले व्यापार मंडल के रविवार को बुलाए गए पहले जनरल हाउस में कारोबारियों के लिए राहत कोष बनाने का फैसला लिया गया है। जैन धर्मशाला में हुए जनरल हाउस के दौरान कारोबारियों ने अपनी समस्याएं भी रखीं। कहा कि शहर में बाहरी तहबाजारी बहुत ज्यादा हो गए हैं। इससे कारोबारियों और शहर के पंजीकृत तहबाजारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पदाधिकारियों ने कहा कि इस बारे में निगम प्रशासन से बात की जाएगी। कई कारोबारियों ने नगर निगम की ओर से जारी किए जा रहे किराया बिलों पर भी सवाल उठाए। कहा कि कई बिल गलत जारी हो रहे हैं। बैठक में चर्चा के बाद व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कई और फैसले भी लिए हैं। कारोबारियों को कानूनी राय देने के लिए दो अधिवक्ताओं की सेवाएं ली जाएंगी। कारोबारी इनसे निशुल्क कानूनी राय ले सकते हैं। कारोबारियों को रात के समय डॉक्टरी सेवा देने का भी भरोसा दिया गया है। साथ ही टैक्स से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए सीए की सेवाएं भी ली जाएंगी। कारोबारियों की मांग पर व्यापार मंडल कार्यालय में सीए को तैनात किया जाएगा।
तीन महीने में पूरी करेंगे मांगें: अध्यक्ष
व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव ठाकुर ने कहा कि कारोबारियों ने जो भी समस्याएं उठाई हैं, उनका तीन महीने में समाधान होगा। उपाध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि हर तीन माह बाद व्यापार मंडल जनरल हाउस बुलाएगा। इसमें पिछले हाउस में उठाई मांगों की समीक्षा भी होगी। इस मौके पर महासचिव संदीप सूद, सह सचिव अभिमन्यु भांगड़ा, कोषाध्यक्ष राज किशोर मौजूद रहे।
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इनसेट
बैठक से बड़े कारोबारियों ने बनाई दूरी
शहर में दो व्यापार मंडल हैं। नए व्यापार मंडल की ओर से रविवार को बुलाए गए जनरल हाउस से शहर के बड़े कारोबारी नेताओं ने दूरी बनाई। हरजीत मंगा की अगुवाई वाले व्यापार मंडल से जुड़े कारोबारी इसमें शामिल नहीं हुए। कारोबारी संजीव बिंदल, सुभाष अरोड़ा, अनिल मोदगिल, रमनीक गोयल, संजय कुमार, हेमंत शेखरी, अशोक कुमार ने कहा कि वे इस जनरल हाउस को नहीं मानते।
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