मेडिकल फार्म जमा न करवाने पर कारोबारियों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।
प्रदेश में कारोबार कर रहे तीन लाख से अधिक कारोबारियों को फूड सेफ्टी एक्ट में अब हर साल मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग के पास जमा करवाना होगा। इसके अलावा स्कूलों में कार्यरत मिड-डे मील वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका तथा विभिन्न संस्थानों में काम कर रहे करीब 6 लाख वर्कर भी इसके दायरे में आएंगे। मंदिर और गुरुद्वारों में लंगर लगाने वालों को भी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करवाना होगा।
मेडिकल फार्म जमा न करवाने पर कारोबारियों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। प्रदेश में फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कारोबारियों के लाइसेंस एक साल से पांच साल तक बनते हैं। पहले लाइसेंस बनाते वक्त एक बार ही कारोबारी और उसके वर्कर का मेडिकल जमा होता था। अब विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि हर साल कारोबारियों को अपना मेडिकल जमा करवाना होगा।
यही नहीं, जो वर्कर कारोबारियों के पास काम करते हैं, उनका मेडिकल भी पास जमा करवाना होगा। अगर कारोबारी ऐसा नहीं करते हैं तो उसके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। एक बार लाइसेंस रद्द हो गया तो कारोबारी तब तक कारोबार नहीं कर सकते, जब तक फिर से लाइसेंस नहीं बनेगा। विभाग के डेजिगनेटिड अधिकारी एलडी ठाकुर ने बताया कि अब सभी कारोबारियों और उनके पास काम करने वाले वर्करों का मेडिकल हर साल बनाकर विभाग को देना होगा। ऐसा न करने वालों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।
एक रिकार्ड के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में तीन लाख कारोबारी खाद्य वस्तुओं का छोटे से लेकर बड़ा कारोबार कर रहे है। इनके पास 9 लाख से अधिक वर्कर काम करते हैं। इन सब को हर साल विभाग के पास मेडिकल जमा करना होगा।
ये भी आएंगे दायरे में
आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में दोपहर का भोजन बनाने वाले कर्मचारी भी इसके दायरे में आएंगे। इन्हें भी विभाग के पास हर साल मेडिकल जमा करवाना होंगा। इसके अलावा मंदिर, गुरुद्वारे और अन्य संस्थानों खाद्य सामग्री बनाने वाले भी इसके दायरे में आएंगे।
इस लिए लिया निर्णय
प्रदेश में कारोबारियों के पास समय-समय पर वर्कर बदलते रहते हैं। पर्यटन सीजन के दौरान होटलों और रेस्तरां में बाहरी राज्यों से भी लोग बुलाए जाते हैं। ऐसे में लोगों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।