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शिमला में बढ़ा प्रदूषण, अब ऑड-ईवन फार्मूला लागू करने की तैयारी

Sun, 01 May 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने ग्रीन हाउस एमिशन इनवेंटरी जारी की। पत्रकार वार्ता में पंवर ने कहा कि राजधानी शिमला में भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। - फोटो : अमर उजाला
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राजधानी शिमला में भी जल्द ही ऑड-ईवन फार्मूला लागू हो सकता है। नगर निगम शिमला ने हिल्सक्वीन को कार्बन न्यूट्रल सिटी बनाने का सपना संजोया है मगर इस समय शिमला में भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। ऐसे में कार्बन उत्सर्जन को कम करना बेहद जरूरी है। इसे नियंत्रित करने के लिए राजधानी दिल्ली की तर्ज पर शिमला में ऑड-ईवन फार्मूला लागू करना एकमात्र विकल्प है।
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नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर का कहना है कि नगर निगम के हाउस में इससे संबंधित प्रस्ताव लाया जाएगा। अगर निगम की आम सहमति बनती है तो बेहतर है, अन्यथा अपने स्तर पर भी वह एनजीटी से यह व्यवस्था लागू करने के लिए आग्रह करेंगे।

बिजली से हो रहा सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जन
पंवर ने बताया कि शहर में बिजली के कारण सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। एक साल में बिजली से 114493 टन कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। इसके बाद डीजल से 54083, पेट्रोल से 24515, केरोसिन से 1399 और एलपीजी से 476 टन कार्बन उत्सर्जन हो रहा है।
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टिकेंद्र पंवर ने जारी की ग्रीन हाउस इनवेंटरी

मौजूदा समय में शिमला में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन हो रहा है और ऊर्जा की खपत हो रही है। - फोटो : अमर उजाला
शनिवार को नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने ग्रीन हाउस एमिशन इनवेंटरी जारी की। पत्रकार वार्ता में पंवर ने कहा कि राजधानी शिमला में भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन हो रहा है। आंकड़े इतने गंभीर हैं कि आने वाले कुछ सालों में शिमला हम लोगों के रहने योग्य नहीं रहेगा।

मौजूदा समय में शिमला में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन हो रहा है और ऊर्जा की खपत हो रही है। उन्होंने बताया कि ग्रीन हाउस एमिशन इनवेंटरी जारी कर शिमला देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है, जिन्होंने यह प्रयास किया है।

इस इनवेंटरी के माध्यम से भविष्य में शिमला के लिए अर्बन प्लानिंग की दिशा तय की जाएगी। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए सोलर उत्पादों पर अनुदान बढ़ाने की जरूरत है। इसके अलावा बिल्डिंग कोड बदलने भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि अर्बन प्लानिंग में सकारात्मक सुधार के लिए सरकार से भी ग्रीन हाउस एमिशन इनवेंटरी साझा की जाएगी।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और इकले ने आठ महीने की स्टडी

शिमला में सालाना 30 फीसदी तक डीजल की खपत बढ़ रही है। सीएनजी को बढ़ावा देकर इसे कम किया जा सकता है। - फोटो : अमर उजाला
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और इकले संस्था ने आठ महीने की स्टडी के बाद राजधानी शिमला की ग्रीन हाउस एमिशनस इनवेंटरी तैयार की है। यूरोपियन यूनियन प्रोजेक्ट के तहत इस योजना पर काम किया गया है।

सोलर प्रणाली, सीएनजी को बढ़ावा देना जरूरी
पंवर ने बताया कि  हाइड्रो प्रोजेक्ट से बिजली पैदा होने के बावजूद हम नेशनल ग्रिड की बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें थर्मल ज्यादा है। सोलर प्रणाली को प्रोत्साहन देकर बिजली से हो रहे कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। इसके अलावा शिमला में सालाना 30 फीसदी तक डीजल की खपत बढ़ रही है। सीएनजी को बढ़ावा देकर इसे कम किया जा सकता है।
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