कच्चीघाटी में जमींदोज हुए भवन की एमसी का आपदा सैल सूचना तक नहीं दे पाया
क्रॉसर
सैल का फील्ड में एक वालंटियर तक नहीं
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में आपदा प्रबंधन के नाम पर नगर निगम सिर्फ बड़े होटलों में लंच पार्टियां करवा रहा है। दो महीने के भीतर नगर निगम ने आपदा प्रबंधन के नाम पर शहर में चार प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाए। इनमें से तीन नामी होटल में लंच पार्टी के साथ हुए।
यह प्रोग्राम महज लंच करवाने, प्रमाण पत्र देने और फोटोग्राफी कर औपचारिकताएं पूरी करने तक रह गए। हालत यह है कि कच्चीघाटी में भवन ढहने से बेघर हुए लोगों की मदद के लिए नगर निगम के पास एक वालंटियर तक नहीं था। निगम के आपदा सैल ने पार्षदों को अलर्ट करने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया है लेकिन उसमें इस हादसे की सूचना तक नहीं दी गई।
ग्रुप में अंतिम अपडेट 30 सितंबर को बारिश के पूर्वानुमान का था। बाकी आपदाओं की तरह यहां भी दमकल विभाग के जवान खतरे से जूझते और लोगों की मदद करते नजर आए। सवाल उठने लगे हैं कि आखिर नगर निगम का आपदा प्रबंधन सैल क्या काम कर रहा है। एमसी ने 6 और 7 अगस्त को होलीडे होम में ट्रांसपोर्टर और होटलियर्स को ट्रेनिंग दी और लंच पार्टी हुई, 17 और 18 अगस्त आईजीएमसी अस्पताल में दिया प्रशिक्षण, 10 सितंबर को होलीडे होम में पार्षदों को दी ट्रेनिंग, लंच भी करवाया और 27 तथा 28 सितंबर को होटल होलीडे होम में फिर ट्रेनिंग और लंच पार्टी दी।
ट्रेनिंग के नाम पर होता है समय बर्बाद
कसुम्पटी के पार्षद राकेश चौहान ने कहा कि बरसात में जीवणू कालोनी में भूस्खलन होने से एक भवन को खतरा पैदा हो गया। निगम के आपदा सैल में शिकायत दी तो जवाब मिला कि यह काम हम नहीं करते। पार्षद बोले कि आपदा सैल खुद कोई काम नहीं करता और जिम्मेदारी पार्षदों पर डाल देता है। ऐसे में इन कार्यक्रमों में जाना छोड़ दिया। पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि आपदा सैल ने पार्षदों से वालंटियर मांगें थे। हमने लिस्ट दी, इन्हें ट्रेनिंग करवाई गई। लेकिन इसके बाद यह कहां गए, किसी को पता नहीं। पार्षद आरती चौहान ने कहा कि सैल महज तनख्वाह ले रहा है, आपदा के वक्त गायब रहता है।
पार्षद कर रहे हैं मदद : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि पार्षदों को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दी है। कच्चीघाटी में भी पार्षद मदद करते रहे। पार्षदों को ही वालंटियर तैयार करने को कहा है, लेकिन अभी तक इसकी लिस्ट नहीं आई है।
वालंटियर होते तो मदद करते : डिप्टी मेयर
नगर निगम प्रशिक्षण कार्यक्रम की तरह यदि वालंटियर तैयार करता तो ऐसे हादसों में मदद हो पाती। प्रयास रहेगा कि वालंटियर की टीम तैयार की जाए तो आपदा में मददगार हो।
-शैलेंद्र चौहान, उप महापौर नगर निगम