ईराक में अभी भी कई हिमाचली फंसे हुए हैं और उनकी मदद के लिए कोई हाथ नहीं बढ़ा रहा। कंपनी पासपोर्ट वापिस नहीं दे रही है तो कई माह से वेतन भी नहीं मिला है।
ऐसे में यह लोग अपनी वतन वापसी के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं। मंडी के एक शख्स ने फेसबुक पर परिजनों को पूरी दास्तां बयां की।
ईराक की अल फरात एंड केमिकल इंडस्ट्री में कार्यरत आधा दर्जन हिमाचलियों सहित 28 भारतीय फंसे हुए हैं। ईराक आर्मी और आतंकवादियों में चल रहे युद्ध के कारण कंपनी में कार्य बंद पड़ा है।
वेतन भी नहीं मिला, पासपोर्ट भी ले लिए
भारतीयों को वापस भी नहीं भेजा जा रहा है। कंपनी भारतीयों के पासपोर्ट भी नहीं दे रही है। कंपनी ने चार महीने से समस्त लोगों को कोई वेतन भी नहीं दिया है।
कंपनी में फंसे हिमाचल के मंडी जिला निवासी प्रीतम सिंह ने अपने परिचित के साथ फेसबुक पर चैट में व्यथा सुनाई। किसी मंत्री या सांसद से बात कर भारतीयों की वापसी के लिए प्रयास करने का आग्रह किया।
बताया कि एक माह से खाली बैठे हैं और कंपनी उनके पासपोर्ट नहीं दे रही। अंबेसी में बात करने पर भी कोई हल नहीं निकल रहा।
कंपनी ने समस्त लोगों के पासपोर्ट भी अपने पास रखे हुए हैं। वापस करने से मना किया जा रहा है। 28 भारतीयों ने भारत वापसी में मदद की गुहार लगाई है।
ये लोग फंसे हैं ईराक में
ईराक में दया सिंह कोटला कलां, सुरेंद्र कुमार नगनोली, प्रशोत्तम जिला ऊना, पवन कुमार झवोला जिला बिलासपुर, जसवीर चंद थलूह रोपड़, हरि कृष्ण कनछेडा रोपड़, गुरवचन सिंह माजरा रोपड़, हरपाल सिंह थलूह रोपड़, बकशीश सिंह मेगपुर रोपड़, बूटा सिंह नग्गल गुरदासपुर, हरदीप सिंह, इंद्रजीत सिंह बरारी रोपड़ फंसे हुए हैं।
कुलदीप कुमार ढगोर रोपड़, प्रीतम सिंह जिला मंडी, दविंद्र पाल पोरिया शहीद भक्त नगर पंजाब, नरेश दसमेश नगर लुधियाणा, सुरेश कुमार हरोली ऊना, मनोज सिंह, अरुण सिंह, ओम प्रकाश अलवर राजस्थान को वतन वापसी के लिए भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
इनके साथ जगदीश मुक्ति नगर, राजा चौहान मुंबई, हरिवंश कुमार, दिलीप कुमार, उमेश कुमार, रूदल प्रसाद यूपी, राजिंद्र, गोरख चंद महाराष्ट्र ईराक में फंसे है।