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बॉलीवुड की शान हैं विंटर क्वीन, वॉयस ऑफ कार्निवाल से निकले कई कलाकार

Fri, 03 Jan 2020 04:50 AM IST
अरविन्द ठाकुर रतन कटोच, अमर उजाला, मनाली/कोकसर
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- फोटो : अमर उजाला
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वर्ष 2020 शुरू होते ही विंटर कार्निवाल का आगाज हो गया है। पहली बार वर्ष 1978 में विंटर कार्निवाल हुआ था। उन दिनों मनाली में पर्यटन व्यवसाय न के बराबर था। साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार और पर्वतारोहण खेल संस्थान के निर्माता हरनाम सिंह ठाकुर, कुल्लू के विधायक ठाकुर कुंजलाल के प्रयासों से विंटर कार्निवाल हुआ था। विंटर क्वीन और वॉयस ऑफ कार्निवाल जैसी प्रतियोगिता करवाकर कई कलाकार इस मंच से निकलकर बॉलीवुड में अपना लोहा मनवा रहे हैं।

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इनमें अनिल सूर्यवंशी, नितिन कुमार, अंकुश भारद्वाज, विनोद राठौर और जैसमीन शामिल हैं।
विंटर कार्निवाल शुरू करने में ठाकुर कुंजलाल का योगदान भी नहीं भुलाया जा सकता। उनके पुत्र छविंद्र ठाकुर ने कहा कि उनके पिता पहली बार जनता पार्टी के टिकट से जीतकर विधायक बने। फिर शांता कुमार मंत्रिमंडल में शामिल हुए। उनके प्रयास से 1978 में मनाली में पहला शरदोसत्व करवाया गया। कम संसाधनों के बावजूद इसका सफल आयोजन हुआ।

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उन दिनों साहसिक खेलों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और विंटर क्वीन प्रतियोगिता करवाई गई। विंटर कार्निवाल में हरनाम सिंह ठाकुर शीतकालीन खेलों को शुरू करने वाले पश्चिमी हिमालय पर्वतारोहण खेल संस्थान के पहले डायरेक्टर थे। इन विभूतियों के संयुक्त प्रयास और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की दूरदर्शी सोच के कारण मनाली में पर्वतारोहण खेल संस्थान की स्थापना हुई।

पंजाब के पहले मुख्यमंत्री प्रताप सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सर्दियों में मनाली की ठहरी जिंदगी में लोगों को कार्निवाल के जरिये साहसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए शीतकालीन खेले शुरू करवाई गईं। मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी जोड़े गए।

इसका जिम्मा मनाली नोटिफाइड एरिया कमेटी के पहले उपाध्यक्ष जीआर प्रेम और कुल्लवी लोकनृत्य संस्कृति को देश-विदेश में एक महत्वपूर्ण मुकाम दिलाने वाले पंडित जाल्फू राम ने संभाला था। वर्तमान में कार्निवाल ने राष्ट्रीय स्तर का दर्जा हासिल कर लिया है। आज देश ही नहीं, विदेश के सांस्कृतिक दल भी कार्निवाल के मंच में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
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