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राखी के त्योहार पर 12 साल बाद बना यह संयोग, पढ़ें क्या करें और क्या नहीं

Fri, 04 Aug 2017 04:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जोगिंद्रनगर (मंडी)
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भाई और बहन के प्यार के अटूट बंधन के पवित्र रिश्ते की डोर राखी के त्योहार पर इस बार भद्रा के साथ ही चंद्र ग्रहण का साया भी रहेगा। ज्योतिषाचार्यों का दावा है कि 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है। जब राखी के दिन ग्रहण लग रहा है। 07 अगस्त को राखी है।
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चंद्रग्रहण रात 10:53 बजे से शुरू होगा। ग्रहण का सूतक 13:53 दोपहर को लग जाएगा। सुबह भद्रा 11:04 बजे तक हो चुकि होगी। सूतक और भद्रा दोनों में ही शुभ कार्य वर्जित है।

इसलिए इन दोनों के बीच का समय राखी बांधने के लिए शुभ है। सुबह 11:05 बजे से लेकर दोपहर 13:52 मिनट तक आप रक्षा बंधन का त्यौहार मना सकते है। रक्षा सूत्र हाथ में जन्माष्टमी तक रहना चाहिए। रक्षा सूत्र सूती धागे का होना बेहतर होता है।
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अपराहन काल में रक्षा बंधन का शास्त्र विधान

शारदा ज्योतिष निकेतन जोगिंद्रनगर के संस्थापक एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ डा. कैप्टन लेखराज शर्मा ने कहा कि रक्षा बंधन का पावन कृत्य भद्रा रहित एंव अपराहन काल में करने का शास्त्र विधान है।

लोक परंपरा तथा आजकल की व्यस्तताओं के दृष्टिगत प्रात: काल ही रक्षाबंधन पर्व मनाने की परंपरा है। इसलिए यदि भद्रा काल में ही रक्षा बंधन आदि शुभ कार्य करना पड़े तो शास्त्रकारों ने भद्रा मुखकाल को छोड़कर भद्रा के पुच्छकाल में रक्षा बंधंनादि शुभ कार्य करने की आज्ञा दी है।
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रहेगा चंद्र ग्रहण का साया

वहीं पंडित मस्त राम शर्मा का कहना है कि राखी के त्योहार पर इस बार भद्रा के साथ ही चंद्र ग्रहण का साया भी रहेगा। इस पर्व मे दूसरों की रक्षा के धर्म भाव को विशेष महत्व दिया गया है।

रक्षा बंधन का वैदिक स्वरूप यही है। इस दिन बहनें भाइयों को राखी बांध कर अपनी जीवन रक्षा का दायित्व उन पर सौंपती हैं। इस वर्ष 7 अगस्त सोमवार को श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधंन का पवित्र त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन इस त्योहार पर भद्रा के साथ ही चन्द्र ग्रहण का साया भी रहेगा।
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