अरली वार्निंग सिस्टम आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। यह प्रदेश में 14 जगह स्थापित हो चुका है। मंडी में कटिंडी से कंमाद के बीच संवेदनशील पहाड़ियों पर 4 यूनिट, कमांद से सालगी तक दो यूनिट, कोटरोपी में एक और गुम्मा में एक यूनिट स्थापित किया गया है।
भूस्खलन से लोगों की जान बचाने के लिए जल्द किन्नौर जिले में अरली वार्निंग सिस्टम यूनिट स्थापित किए जाएंगे। कांगड़ा और मंडी में भी और यूनिट लगाए जाएंगे। राज्य सरकार ने इसके लिए 50 लाख रुपये जारी किए हैं। इसे ऐसी जगह लगाया जाता है, जहां भूस्खलन का खतरा अधिक रहता है। जब भी उस जगह जमीन में हलचल होती है तो प्रोसेसिंग यूनिट संदेश पहुंचाता है। अलर्ट यूनिट में रेड लाइट जलती है और हूटर बजता है। इसे कंट्रोल कर रही टीम के पास भी अलर्ट आता है।
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अरली वार्निंग सिस्टम आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। यह प्रदेश में 14 जगह स्थापित हो चुका है। मंडी में कटिंडी से कंमाद के बीच संवेदनशील पहाड़ियों पर 4 यूनिट, कमांद से सालगी तक दो यूनिट, कोटरोपी में एक और गुम्मा में एक यूनिट स्थापित किया गया है। कांगड़ा के रानीताल में दो, किन्नौर में चार यूनिट लगे हैं। कांगड़ा और मंडी में और यूनिट लगाने की योजना बनाई जा रही है।
जल्द नए यूनिट यहां स्थापित होंगे। इस यूनिट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारत में यह सबसे कम खर्च पर तैयार पहला यंत्र है। भूस्खलन पर तैयार किए गए यंत्रों पर एक करोड़ तक राशि खर्च होती है। मंडी के पड्डल मैदान में लगी प्रदर्शनी में प्रोसेसिंग और अलर्ट यूनिट लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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पांच लोगों की टीम ने किया है तैयार
अरली वार्निंग सिस्टम 2018 में पांच लोगों की टीम ने तैयार किया है। इनमें एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरुण दत्त, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. केवी उदय, डायरेक्टर प्रवीण, अंकुश पठानिया और बिजनेस मैनेजर चंदन वैद्य शामिल हैं। मैनेजर चंदन वैद्य ने कहा कि आईआईटी मंडी की टीम के बनाए यूनिट को काफी सफलता मिली है।