दशहरा के लिए देवताओं का कूच
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15 अक्तूबर से शुरू होने वाले कुल्लू दशहरा के लिए जिले के देवी-देवता मंदिरों से रवाना हो गए हैं। बुधवार को जिले भर से करीब 50 से अधिक देवरथ कुल्लू के लिए कूच कर गए हैं। बालू नाग के साथ मनु ऋषि, चोतरू नाग, टकरासी नाग, कोट पझारी और पुंडरिक ऋषि ढोल-नगाड़ों के साथ निकले। देवता 14 अक्तूबर की शाम को ढालपुर स्थित अस्थायी शिविरों में पहुंचेंगे। जिला के बाह्य सराज आनी-निरमंड के अलावा सैंज, गड़सा, बजौरा, मणिकर्ण व मनाली आदि देवी-देवताओं की रथयात्रा शुरू हो गई है। जबकि खुड़ीजल और देवता श्रृंगा ऋषि सहित करीब एक दर्जन देवी-देवता 12 अक्तूबर से आना शुरू हो गए हैं।
150 ये 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाह्य सराज के देवता खुड़ीजल, ब्यास ऋषि, कोट पझारी, टकरासी नाग, चोतरू नाग ने बंजार घाटी में प्रवेश कर लिया है। सोने-चांदी के मुख मोहरों से सजे देवी-देवताओं के रथ सबके लिए आकर्षण का केंद्र रहते हैं। जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान, कारदार भागे राम राणा और कारदार शेर सिंह ने कहा कि जिले भर के देवता कुल्लू के लिए निकल पड़े हैं। वीरवार देर शाम तक 150 से अधिक देवी-देवता अस्थायी शिविरों में पहुंच जाएंगे।