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देव शक्ति से मरकर फिर जीवित होगा नड़

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देव आस्था और दैवीय शक्ति के सामने एक बार फिर सैकड़ों शीश नतमस्तक होंगे। धार्मिक स्थल बिजली महादेव में तीन बरस बाद काहिका उत्सव में 15 सितंबर को नड़ की मौत हो जाएगी।
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देव परंपरा अनुसार उसके जीते जी अंत्येष्टि में प्रयोग होने वाले पंच रत्न की भी व्यवस्था की गई है। इस अद्भुत नजारे के साक्षी घाटी के सैकड़ों हारियान और बाहर से आए पर्यटन श्रद्धालु भी बनेंगे।

काहिका में नड़ की मौत हो जाएगी और ढोल, नगाड़ों तथा नरसिंगों की मंगल ध्वनि के बीच देवता बिजली सहित गूरों और कारकूनों द्वारा नड़ को पुन: जीवित कर दिया जाएगा। नड़ को काहिका के मंडप से करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर चिन्हित स्थान ’खनाकड़ा ’ तक ले जाएंगे।
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सबसे पहले हवा में फायर किया जाएगा। इसके वाद देवता के मुख्य कारकून धनुष पर बाण चढ़ाकर दैवीय शक्ति से विपरीत दिशा में दागेंगे। तीर छूटते ही नड़ दौलत राम की मौत हो जाएगी।
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नड़ जीवित नहीं रहा तो महादेव की संपत्ति परिजनों को मिलेगी

इसके बाद शुरू हो जाएगी अंत्येष्टि प्रक्रिया। बिजली महादेव के कारदार अमर नाथ ने बताया कि प्रक्रिया से पूर्व किसी तरह से अनहोनी होने की आशंका के चलते जौ का आटा अभिमंत्रित कर छिड़का जाता है।

देवता के हारियान और देवलु नड़ के जनाजे को काहिका मंडप तक करीब दस देवलु उठाकर लाएंगे और फिर नड़ की पत्नी के आग्रह पर नड़ को जिंदा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

देव परंपरानुसार अगर किसी सूरत में नड़ जीवित नहीं होता है तो तमाम बिजली महादेव की संपत्ति को नड़ के परिजनों के नाम करने का विधान है।
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