हिमाचल में भाजपा के सीएम पद के प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने के बाद नई दिल्ली से लेकर शिमला तक मंथन का दौर शुरू हो गया है। भाजपा को पूर्ण बहुमत के बाद अब मुख्यमंत्री कौन होगा इस पर माथापच्ची शुरू हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने नई दिल्ली में पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और नरेंद्र तोमर से बैठक की।
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सीएम पद के लिए पार्टी अनुभव एवं जाति समीकरणों पर मंथन कर रही है। इसके लिए मिशन 2019 को भी ध्यान में रखा जा रहा है। हिमाचल में नए सीएम के लिए तैनात किए दोनों पर्यवेक्षक सीतारमण और तोमर बुधवार को शिमला आएंगे और नवनिर्वाचित विधायकों से उनकी राय लेंगे। इसके लिए सभी भाजपा विधायकों को शिमला बुलाया गया है।
इसमें प्रदेश प्रभारी और भाजपा के अन्य नेता में रहेंगे। उधर, सीएम पद की रेस में चल रहे जयराम ठाकुर, नरेंद्र बरागटा, सुरेश भारद्वाज भी दिल्ली में डटे रहे। दिल्ली से लौटने के बाद जयराम ने शिमला में बैठक भी की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक हिमाचल के लिए नेतृत्व फिलहाल तीन नामों जेपी नड्डा, जयराम ठाकुर और अजय जंवाल पर विचार कर रहा है। इनमें जयराम और जंवाल ठाकुर बिरादरी से हैं तो नड्डा ब्राह्मण बिरादरी से।
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इनमें जंवाल कुशल संगठनकर्ता हैं तो जयराम के पास बतौर मंत्री प्रशासन का अनुभव है। नड्डा में प्रशासनिक और सांगठनिक क्षमता तो है मगर राज्य में ठाकुर बिरादरी एक बड़ा तबका है। सवा साल बाद ही पार्टी को लोकसभा चुनाव का सामना करना है, ऐसे में कमान सौंपने पर गहरा मंथन हो रहा है। ठाकुर बिरादरी के कारण मतदान से ठीक पहले पार्टी ने पहली पसंद होने के बावजूद नड्डा के बजाय प्रेम कुमार धूमल को सीएम उम्मीदवार बनाया था।
सीएम रेस में नड्डा, जयराम समेत चार नाम
जयराम ठाकुर
हिमाचल में मुख्यमंत्री पद की रेस में चार नामों पर मंथन तेज हो गया है। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, जयराम ठाकुर, अजय जंवाल और नरेंद्र बरागटा है। जातीय समीकरणों के साथ प्रशासनिक क्षमता तो पैमाना रहेगा, लेकिन संघ में पैठ भी चेहरा तय करने में अहम रहेगी।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों की माने तो नड्डा को अगर केंद्रीय कैबिनेट से उन्हें हटाने पर सहमति नहीं बनी तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयराम अगली पसंद हो सकते हैं। वहीं, धूमल खेमा भी उनकी हार के बावजूद उनके लिए जिस तरह से लॉबिंग कर रहा है, उससे वे रेस में बने हैं।
विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल की हारने से एकाएक समीकरण बदल गए हैं। पार्टी ने दो पर्यवेक्षक नियुक्त कर संभावित नामों पर एक राय बनानी शुरू कर दी है। जयराम के पक्ष में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी सटीक बैठ रहे हैं। जयराम को केंद्र से इसके संकेत भी मिले हैं, जिसके बाद वे तुरंत शिमला पहुंच गए हैं।
यह नाम भी चर्चा में
सुरेश भारद्वाज
नए नामों में शिमला से जीते विधायक सुरेश भारद्वाज, राजीव बिंदल, किशन कपूर जैसे नाम हैं। भारद्वाज तीन बार से लगातार जीतने के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। किसी खेमे विशेष से उनका नाता नहीं है और संघ में भी उनकी मजबूत पकड़ है।
बिंदल भी नड्डा के करीबियों में हैं। सोलन छोड़कर नाहन से लगातार दूसरी जीत और प्रदेश सरकार में मंत्री का अनुभव भी है। चुनाव प्रबंधन के भी बिंदल मास्टर हैं। शांता कैंप से किशन कपूर का नाम भी चर्चा में आ सकता है। कपूर कई बार मंत्री रहे हैं। कांगड़ा से प्रतिनिधित्व को लेकर उनका नाम आगे बढ़ाया जा सकता है।
विधायक दल में धूमल खेमा मजबूत
चुनाव में हार के बावजूद प्रेम कुमार धूमल को खारिज नहीं किया गया है। विधायक दल में उनके खेमे के सर्वाधिक विधायक बताया जा रहे हैं। उनके लिए एक विधायक ने सीट छोड़ने तक का दावा कर दिया है।
केंद्र में मोदी और शाह के अलावा वरिष्ठ नेता अरुण जेटली समेत अन्य केंद्रीय मंत्रियों से पुराना तालमेल है। जातीय समीकरणों के साथ उनके दो बार का सीएम कार्यकाल उनके दावे को बनाए हुए है।
जेपी नड्डा
राजनीतिक अनुभव - केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, सचिव केंद्रीय संसदीय बोर्ड, राष्ट्रीय संगठन में कई पदों पर सेवाएं और प्रदेश में भी मंत्री रहे हैं।
आयु - 58 वर्ष
पसंद का कारण - प्रदेश और केंद्र सरकार का अनुभव, संघ की मजबूत पृष्ठभूमि, पार्लियामेंट्री बोर्ड में मजबूत पकड़।
रिजेक्ट होने की वजह - केंद्रीय कैबिनेट में होना, उपचुनाव का जोखिम, ब्राह्मण होने से जातीय समीकरण पक्ष में नहीं।
जयराम ठाकुर
राजनीतिक अनुभव - 1998 में पहली बार विधायक बने। पांच बार के विधायक, धूमल सरकार में ग्रामीण विकास और पंचायतीराज मंत्री, पूर्व पार्टी प्रदेश अध्यक्ष।
आयु - 53 वर्ष
पसंद का कारण - जेपी नड्डा के करीबी ठाकुर की संघ में पैठ है। निर्विवाद छवि के साथ उनका राजपूत होने के साथ दूसरे बड़े जिले मंडी से है, जहां भाजपा की बंपर जीत हुई है।
रिजेक्ट होने की वजह - धूमल खेमे के विधायकों को उनके पक्ष में मनाना।
नरेंद्र बरागटा
राजनीतिक अनुभव - कई बार के विधायक रहे बरागटा का प्रदेश में दो बार मंत्री पद का अनुभव। प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष हैं।
आयु - 65 वर्ष
पसंद का कारण - अगर धूमल के नाम पर सहमति नहीं बनी तो उनके खेमे के विधायक बरागटा के समर्थन में आ सकते हैं। जातीय समीकरणों में राजपूत होना।
रिजेक्ट होने की वजह - नड्डा खेमे को उनके नाम पर सहमत कर पाना।
अजय जम्बाल
राजनीतिक अनुभव - राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में कई अहम ओहदों पर रहे हैं। वर्तमान में पूर्वोत्तर जोन के भाजपा सचिव संगठन हैं। जम्मू कश्मीर से लेकर पंजाब और अरुणाचल में इन्होंने संगठन मजबूत किया है।
आयु - 48 से 50 साल
योग्यता- संघ में मजबूत पैठ के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से निकटता है। राजपूत होने से जातीय समीकरण भी पक्ष में हैं।
रिजेक्ट होने की वजह - पूर्वोत्तर के चार राज्यों में चुनाव होने हैं, जिससे वहां से उनको हटाना जोखिम भरा होगा। इसी के साथ इनके लिए सीट रिक्त करवाने के लिए कसरत करनी होगी।
ये नाम भी चर्चा में
संघ की मजबूत पृष्ठभूमि वाले अजय जम्बाल भी दावेदारों में शामिल हैं। जम्बाल मौजूदा समय में संघ के उत्तर पूर्व के प्रभारी हैं। उनका राजपूत होने के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के साथ भी बेहतर समन्वय है।