फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में आ सकता है भूचाल

Wed, 20 Dec 2017 02:11 PM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद कांग्रेस मेंभूचाल आ सकता है। आलाकमान कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य के कांग्रेस संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बड़े बदलाव कर सकता है। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने वाले नेता तक अपनी ही सीटें नहीं बचा पाए और बेनकाब हो गए।
विज्ञापन


इसकी भी हाईकमान जवाबतलबी कर सकता है। कांग्रेस संगठन के कई जिम्मेवार पदाधिकारियों से इस्तीफे भी लिए जा सकते हैं। बेशक कांग्रेस के  कई नेता हार का स्पष्टीकरण पांच साल के बदलाव के ट्रेंड का बहाना बनाकर दे रहे हों, मगर वे इस तर्क से राष्ट्रीय नेतृत्व को रिझा पाएंगे, इस पर संदेह है।

हाईकमान साल 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान मेें रखकर कडे़ फैसले ले सकता है, जिससे पिछली बार की तरह चारों सीटों पर सूपड़ा साफ न हो। दिलचस्प ये भी है कि सरकारी संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल करना भी दिग्गज मंत्रियों और सत्तासुख भोग रहे कांग्रेस नेताओं के काम नहीं आ पाया।
विज्ञापन


ज्यादातर दिग्गज प्रत्याशी तो चुनावी प्रचार में अपनी सीटों में ही धंसे रहे, जबकि अकेले वीरभद्र ही पूरे हिमाचल में ताबड़तोड़ प्रचार करते नजर आए। पांच मंत्री, दो पूर्व पार्टी प्रदेशाध्यक्ष तक चुनाव हार गए। इन सारे दिग्गजों को हाईकमान को हार के कारण बताने पड़ सकते हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

वीरभद्र के पार्टी के अंदरूनी विरोधी हारे

चुनाव में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पार्टी के अंदरूनी विरोधियों में से मंत्री कौल सिंह ठाकुर और जीएस बाली चुनाव हार गए। पहले ये सीएम पद के दावेदार भी रहे।

वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स का नामांकन रद्द होने से वे वैसे ही रेस से बाहर हो गई थीं। वीरभद्र के करीबी मंत्रियों में ठाकुर सिंह भरमौरी, प्रकाश चौधरी और सुधीर शर्मा तक चुनाव हार गए। 

भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की बढ़त से बची सुक्खू की लाज 
भाजपा के गढ़ हमीरपुर जिले में कांग्रेस की बढ़त होने और भाजपा के मुख्यमंत्री के चेहरे प्रेम कुमार धूमल तक के हार जाने से पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू की भी लाज बची।

पांच साल पहले दो बार के कांग्रेस विधायक सुक्खू इस गढ़ में अपनी नादौन सीट पर चुनाव हार गए थे। चुनाव की घोषणा के बाद अधिकांश वक्त अपनी सीट को देकर वे अपनी सीट भी निकाल पाए।

हमीरपुर जिले की पांच में से तीन सीटों पर कांग्रेस की जीत के कारण चाहे जो मर्जी रहे हों, मगर जाहिर है कि सुक्खू समर्थक इसे अपने प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी बचाए रखने के लिए भुनाने का प्रयास करेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें