प्रदेश में विधानसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद कांग्रेस मेंभूचाल आ सकता है। आलाकमान कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य के कांग्रेस संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बड़े बदलाव कर सकता है। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने वाले नेता तक अपनी ही सीटें नहीं बचा पाए और बेनकाब हो गए।
इसकी भी हाईकमान जवाबतलबी कर सकता है। कांग्रेस संगठन के कई जिम्मेवार पदाधिकारियों से इस्तीफे भी लिए जा सकते हैं। बेशक कांग्रेस के कई नेता हार का स्पष्टीकरण पांच साल के बदलाव के ट्रेंड का बहाना बनाकर दे रहे हों, मगर वे इस तर्क से राष्ट्रीय नेतृत्व को रिझा पाएंगे, इस पर संदेह है।
हाईकमान साल 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान मेें रखकर कडे़ फैसले ले सकता है, जिससे पिछली बार की तरह चारों सीटों पर सूपड़ा साफ न हो। दिलचस्प ये भी है कि सरकारी संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल करना भी दिग्गज मंत्रियों और सत्तासुख भोग रहे कांग्रेस नेताओं के काम नहीं आ पाया।
ज्यादातर दिग्गज प्रत्याशी तो चुनावी प्रचार में अपनी सीटों में ही धंसे रहे, जबकि अकेले वीरभद्र ही पूरे हिमाचल में ताबड़तोड़ प्रचार करते नजर आए। पांच मंत्री, दो पूर्व पार्टी प्रदेशाध्यक्ष तक चुनाव हार गए। इन सारे दिग्गजों को हाईकमान को हार के कारण बताने पड़ सकते हैं।