राजधानी शिमला में फैले पीलिया मामले में वीरवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। निर्धारित तारीख तक कोर्ट में मांगी गई जानकारी नहीं देने पर आईपीएच के अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव, मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता पर कोर्ट की अवमानना का केस चल सकता है। कोर्ट ने आईपीएच के दो इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दोनों अफसरों को तलब किया है।
इन अफसरों पर हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा दायर करने का आरोप है। कोर्ट ने एसआईटी को सोलन के मामलों की भी जांच करने के आदेश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में फैले पीलिया से संबंधित जनहित याचिका में उन अधिकारियों का ब्यौरा मांगा है जो 19 सितंबर 2014 से आज तक आईपीएच विभाग में साफ पानी की सप्लाई को मुहैया करवाने के लिए शिमला में तैनात थे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले के लिए आईपीएच विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव, मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने कहा कि इनके खिलाफ हाईकोर्ट द्वारा पिछली याचिका में दिए निर्देशों की अवहेलना करने का मामला चलाया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने आईपीएच विभाग में कार्यरत इंजीनियर सुमन विक्रांत और सुनील जस्टा के खिलाफ हाईकोर्ट के समक्ष झूठा हलफनामा दायर करने के लिये प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सुनील जस्टा कोर्ट में उपस्थित रहे जबकि सुमन विक्रांत कोर्ट में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने इन दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश भी दिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने कोर्ट के पिछले आदेशानुसार अपनी कोई रिपोर्ट पेश नहीं की। शिक्षा विभाग के सचिव और लोक संपर्क विभाग के निदेशक को अदालत के आदेशों पर अमल न करने के कारण अपनी स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा गया है। मामले पर अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी।